देश के मुस्लिमों में बेचैनी और असुरक्षा की भावना : हामिद अंसारी

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उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने राज्यसभा में अपने कार्यकाल के अंतिम स्पीच में कहा कि लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था कि लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जरूरी है। डेमोक्रेसी में उस वक्त अन्याय होता है जब अपोजिशन को मुक्त रूप से सरकार की नीतियों की आलोचना नहीं करने दी जाती। लेकिन ये भी सही है कि जिम्मेदारियों के बारे में भी पता होना चाहिए।
विदाई भाषण में अंसारी ने कहा कि हमारा पद क्रिकेट के अंपायर या हॉकी के रेफरी की तरह है, जो बिना खेले केवल खेल देखता है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा को केवल रोकटोक के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि आने वाले उपराष्ट्रपति बेहतर काम करेंगे। शुक्रवार को नए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू कार्यभार संभालेंगे।
इसके पूर्व अंसारी ने राज्यसभा टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि बीफ पर बैन लगाना एक तरह से पक्षपाती रवैया है। मैं किसी राजनीतिक शख्स या दल के बारे में बात नहीं करूंगा, लेकिन जब भी कोई ऐसा कमेंट होता है, तो मैं कहूंगा कि वह शख्स नासमझ है या उसका पक्षपातपूर्ण रवैया है या फिर वह देश के उस खाके में फिट नहीं होता, जिस पर भारत को हमेशा गर्व होता है। सही मायने में तो हमारा समाज सबको समाहित करने वाला है। अंसारी से पूछा गया था कि एक मुसलमान के रूप में वह ऐसे बयानों पर कैसा महसूस करते हैं?
अंसारी ने कहा कि टॉलरेंस यह एक अच्छी खूबी है लेकिन यह काफी नहीं है। लिहाजा आपको टॉलरेंस से आगे बढ़ते हुए स्वीकार करने की राह पर बढ़ना होगा। हम टॉलरेंस के बारे में बात क्यों करते हैं? क्योंकि आप किसी उस बात को सहन करने की जरूरत महसूस करते हैं, जो शायद आपके हिसाब से नहीं है।


अंसारी ने भीड़ की ओर से लोगों को पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं, घर वापसी और तर्कवादियों की हत्याओं का हवाला देते हुए कहा कि यह भारतीय मूल्यों का बेहद कमजोर हो जाना, सामान्य तौर पर कानून लागू करा पाने में विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की योग्यता का चरमरा जाना है और इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात किसी नागरिक की भारतीयता पर सवाल उठाया जाना है।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह इस बात से सहमत हैं कि मुस्लिम समुदाय में एक तरह की शंका है और जिस तरह के बयान उन लोगों के खिलाफ दिए जा रहे हैं, उससे वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं?र अंसारी ने कहा कि ‘हां, यह आकलन सही है, जो मैं देश के अलग-अलग हलकों से सुनता हूं। मैंने बेंगलुरु में यही बात सुनी। मैंने देश के अन्य हिस्सों में भी यह बात सुनी। मैं इस बारे में उत्तर भारत में ज्यादा सुनता हूं, बेचैनी का अहसास है और असुरक्षा की भावना घर कर रही है।
यह पूछे जाने पर कि क्या मुस्लिमों को ऐसा लगने लगा है कि वे ‘अवांछित’ हैं?र अंसारी ने कहा कि मैं इतनी दूर नहीं जाऊंगा, असुरक्षा की भावना है। तीन तलाक के मुद्दे पर अंसारी ने कहा कि यह एक ‘सामाजिक विचलन’ है, कोई धार्मिक जरूरत नहीं। धार्मिक जरूरत बिल्कुल स्पष्ट है, इस बारे में कोई दो राय नहीं है लेकिन पितृसत्ता, सामाजिक रीति-रिवाज इसमें घुसकर हालात को ऐसा बना चुके हैं जो अत्यंत अवांछित है। उन्होंने कहा कि अदालतों को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि सुधार समुदाय के भीतर से ही होंगे। कश्मीर मुद्दे पर अंसारी ने कहा कि यह राजनीतिक समस्या है और इसका राजनीतिक समाधान ही होना चाहिए।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बारे में अंसारी ने कहा कि कोविंद के राष्ट्रपति बनने से पहले से ही मैं उन्हें जानता था। ये मेरे लिए फायदेमंद रहा। उनके गवर्नर बनने के दौरान मैं कई बार बिहार गया। उनसे अच्छी बातचीत हुई। हर शख्स की अपनी एक राजनीतिक सोच होती है, लेकिन चीजें आपको नया अनुभव देती हैं। ये सच है कि संवैधानिक पद पर बैठने के बाद कुछ बाधाएं होती हैं, लेकिन उन्हें समझदारी से हल किया जा सकता है।।
कोलकाता में 1 अप्रैल, 1937 को जन्मे हामिद अंसारी की पढ़ाई सेंट एडवर्ड्स हाई स्कूल, शिमला, सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुई। वे भारतीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर रहे। 10 अगस्त, 2007 को भारत के 13वें उपराष्ट्रपति चुने गए और लगातार दो टर्म तक यह जिम्मेदारी संभाली।

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