केंद्र सरकार देश में रक्षा उत्पादन के लिए जारी नीति के बाद 60 हजार करोड़ रुपये के पनडुब्बी कार्यक्रम की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है।
यह महत्वाकांक्षी रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत शुरू की जाने वाली पहली परियोजना होगी। पिछले महीने इस मॉडल को अंतिम रूप दिया गया था। इसका उद्देश्य रक्षा उत्पादन के लिए निजी क्षेत्र के अग्रणी निर्माताओं को जोड़ना है।
रक्षा मंत्रालय जल्द ही परियोजना के लिए एक्सप्रेसन ऑफ इंट्रेस्ट (रुचि-प्रकटन) जारी कर सकता है ताकि सारी प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके। सूत्रों के अनुसार इंजीनियरिंग कंपनियां लार्सन एंड टूब्रो एवं रिलायंस डिफेंस इसमें भाग ले सकती हैं।

भारतीय नौसेना की परियोजना-75 के तहत फिलहाल स्कॉर्पीन श्रेणी की छह पनडुब्बियों का निर्माण किया जाना है। फ्रांसीसी नौसेना की रक्षा और ऊर्जा कंपनी DCNS ने इन पनडुब्बियों को डिजाइन किया है। इनका निर्माण मुंबई में मझगांव डॉक लिमिटेड में किया जा रहा है।
रणनीतिक साझेदारी के मॉडल में निर्दिष्ट नियमों पर केंद्रित परियोजना के लिए सरकार बाद में विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (OEM) के चयन की प्रक्रिया शुरू करेगी। परियोजना पी-75 (आइ) परियोजना-75 के आगे के क्रम की परियोजना है।

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