साइकिल रेस में दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली प्रतियोगिता Race Across America (RAAM) में पेशे से डॉक्टर नासिक के श्रीनिवास गोकुलनाथ और नागपुर के अमित समर्थ ने जीत दर्ज कर भारत का नाम दुनिया भर में रौशन किया है.
ये रेस 12 दिन में पूरी करनी होती है. मगर 36 साल के श्रीनिवास ने इसे 11 दिन, 18 घंटे, 45 मिनट में पूरा कर लिया, तो अमित को इस रेस को पूरा करने में 11 दिन, 21 घंटे लगे. हालांकि श्रीनिवास का ये दूसरा प्रयास था, जबकि अमित ने ये रेस अपने पहले प्रयास में ही जीत ली है. रेस में दुनिया के कोने-कोने से प्रतियोगी भाग लेते हैं. रेस अमेरिका के पश्चिमी किनारे से शुरू होकर कोस्ट रेंज, इम्पीरियल ड्युन्स, मॉन्युमेंट वैली होते हुए पूर्वी किनारे पर खत्म होती है.
RAAM दुनिया की सबसे कठिन साइकिल रेस मानी जाती है, क्योंकि 4941 किलोमीटर की इस रेस के लिए रेसर को 12 अमेरिकी राज्यों को पार करना पड़ता है. इस रास्ते में 2 बड़े रेगिस्तान और 4 लम्बी नदियां पड़ती हैं. इसके अलावा लगभग 1,70,000 फ़ीट की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है. इस दौरान इन लोगों को एवरेस्ट पर साढ़े चार बार चढ़ने जितनी उंचाई यानि करीब 1,70,000 फिट की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है. इस दौरान अमेरीका की चार सबसे लम्बी नदियों कोलोराडो, मिसिसिप्पी, मिसूरी, ओहायो और दो रेगिस्तान भी पार करने पड़ते हैं.

ये दोनों डॉक्टर्स पहले भी साइकिलिंग की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले कर जीत हासिल कर चुके हैं. मगर दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगिता में दोनों की कड़ी मेहनत ने इन्हें न सिर्फ़ रेस में सफ़लता दिलाई, बल्कि हमारे देश का नाम भी रौशन किया.
श्रीनिवास नासिक में आर्मी डॉक्टर हैं. उन्होंने इस जीत के बारे में कहा कि मैं 2009 से ही Ultracyclist रहा हूं. मैं जब 150 किलोमीटर की रेस पूरी करता था, तो सोचता था कि 200 किलोमीटर क्यों नहीं? फिर सोचता कि 300 किलोमीटर क्यों नहीं? मैं हमेशा ख़ुद को वो काम करने के लिए चैलेंज करता था, जो मैंने कभी नहीं किया.
उन्होंने आगे बताया कि ऐसी रेस में जाने के लिए कम से कम 15-16 महीनों के तैयारी की ज़रूरत पड़ती है. मुझे इसके लिए 2 साल कड़ी मेहनत करनी पड़ी. इस रेस में जीतने के लिए 430- 440 किलोमीटर रोज़ साइकिल चलाना ज़रूरी है. मैं ट्रेनिंग के दौरान नौकरी और परिवार को मैनेज करते हुए भी 6 घंटे रोज़ निकलता था.
इस रेस को जीतने वाले डॉक्टर अमित ने पहले दिन सोए बिना ही साइकलिंग की. बाद में उन्होंने रोज सिर्फ दो घंटे सोकर इस रेस को पूरा किया. अपनी जान जोखिम में डालकर देश का नाम रोशन करने वाले इन लोगों ने वो कर दिखाया है, जिसके बारे में अब तक किसी ने सोचा भी नहीं था. हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए Pileekhabar के Facebook पेज को लाइक करें

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