राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को दिल्ली के झंडेवालान इलाके में संघ के एक नए सात मंजिले भवन की आधारशिला रखी।

भागवत ने इस अवसर कहा कि चूंकि यह संगठन का कार्यालय होगा, इसलिए संघ जनता से धन नहीं मांगेगा। इस भवन के निर्माण के लिए रूपयों की व्यवस्था हमारे कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों द्वारा ही होगा। उन्होंने कहा कि नए भवन के निर्माण को लेकर स्वयंसेवकों में जिज्ञासा और उत्साह है, जब हमने काम शुरू किया तो हमारे पास संसाधन नहीं थे, लेकिन स्वयंसेवक काम करने के लिए उत्सुक थे।

पत्रकारों से बाद में बात करते हुए RSS की दिल्ली इकाई के उपाध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि सात मंजिले प्रस्तावित नये भवन का निर्माण 3.5 लाख वर्ग फुट क्षेत्रफल में किया जाएगा, जिसमें तीन ब्लॉक होंगे तथा पार्किंग के लिए भी अच्छी-खासी जगह होंगी । कुमार ने कहा कि जगह की बढ़ती कमी के अलावा पिछला भवन काफी पुराना और जर्जर भी हो चुका था, इसलिए नए भवन के निर्माण का निर्णय किया गया।

भवन की आधारशिला रखने के लिए आयोजित समारोह में दिल्ली RSS के पदाधिकारियों सहित कई भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने हिस्सा लिया। जिनमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन और खेल मंत्री विजय गोयल शामिल थे।

इसके पूर्व जम्मू में आज संघ कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि समाज देश की संप्रभुता, एकता एवं अखंडता से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं करेगा। अलगाववाद का समर्थन करने वालों और सीमापार के आकाओं की शह पर काम करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों ने देश की अखंडता की रक्षा के लिए भारी कठिनाइयां उठायी हैं।आपने देश के वास्ते कठिनाइयां झेली हैं, ऐसे में स्थिति का हल जरूरी है। यदि स्थिति लंबे समय तक हल नहीं होती तो इसके दो कारण हो सकते हैं। या तो आपमें स्थिति का हल करने का साहस नहीं है या फिर समस्या के समाधान की हमारी कोशिशें में कमी है।

भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में समाज एक शक्तिशाली इकाई है जिसमें अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने की ताकत है। समाज जो कुछ चाहता है, सरकार को उस दिशा में काम करना पड़ता है। लोकतंत्र में यही नियम है। वैसे देश ने कुछ ही दशक पहले संघीय सरकार को अंगीकार किया है लेकिन यह युगों से एक राष्ट्र रहा है। इस देश में हमें राष्ट्रभक्ति के कानूनों की जरूरत नहीं है। हमने शासन के संघीय ढांचे केा अपनाया है लेकिन अनादि काल से हम एक देश हैं।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया है कि भारतीय उपमहाद्वीप के आज के निवासियों के 40 हजार साल पहले के पूर्वज समान ही थे। उन्होंने कहा कि यह साबित हो गया हे कि दुनिया के इस हिस्से में जो लोग रहते हैं, उनके पूर्वज समान थे ओर सभी हिंदू हैं। हिंदू होने का मतलब यह नहीं है कि आप किस देवता की पूजा करते हैं या किसकी नहीं, यह पहचान है, हमारी संस्कृति और हमारी विरासत की जो हमने सदियों से स्वीकार की है।

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