बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि मेरी दिली ख्वाहिश है कि दिल्ली का मुख्यमंत्री कोई बिहारी और कनाडा का प्रधानमंत्री कोई सिख बने।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में रहने वाले बिहारी वहां प्रवासी नहीं बल्कि वहां का निवासी हैं। बिहारी या किसी भी भारतीय को देश के किसी भी हिस्से में रहने और काम करने का अधिकार है, उसे प्रवासी कहना गलत है। देश एक है और राज्य प्रशासनिक सुविधा के हिसाब से बनाए गए हैं। अपने देश में कोई प्रवासी कैसे हो सकता है? मुख्यमंत्री पत्रकार अरविंद मोहन की बिहारी मजदूरों की पीड़ा और ‘चंपारण सत्याग्रह’ पर आधारित पुस्तकों के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि बिहारी अपनी मेहनत के बल पर कहीं भी अपना झंडा गाड़ देते हैं। हालांकि कई राज्यों में बिहारियों पर कई तरह के कटाक्ष किए जाते रहते हैं, लेकिन अब तो बिहारी कई राज्यों में राजनीतिक शक्ति के रूप में भी उभर रहे हैं। बिहार के साथ तो स्वतंत्रता के बाद से ही भेदभाव किया जाता रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में पब्लिक निवेश कम हुआ जिस कारण विकास के पैमाने पर राज्य पिछड़ गया। पैसा पैसे को आकर्षित करता है, यही कारण है कि जहां निवेश अधिक होता है वहीं लगातार निवेश होते रहता है। उन्होंने ने कहा कि बिहार लगातार अपने दम पर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। राज्य की विकास दर कई विकसित राज्यों से अधिक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार ने सामाजिक फ्रंट पर कई अहम निर्णय लिया है। शराबबंदी उसी में से एक है। नारी सशक्तीकरण की दिशा में राज्य सरकार ने स्थानीय निकाय के चुनाव में 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की, लेकिन स्थानीय चुनाव में 60-70 फीसदी महिलाएं जीत कर आ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार से बाहर जाने के पीछे कई कारण हैं। एक तो बेहतर अवसर की खोज में लोग बाहर जाते हैं, जाना भी चाहिए, लेकिन एक दूसरा प्रमुख कारण सामाजिक पृष्ठभूमि में छिपी हुई है। यहां के लोग सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण बिहार में पहरेदारी एवं दरबानी का काम करने में अपमानित महसूस करते हैं, लेकिन बाहर जाकर यही काम दिलचस्पी से कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई राज्यों की अर्थव्यवस्था बिहारियों के भरोसे चल रही है। अगर उन राज्यों में बिहारी नहीं जाएं तो उनके यहां के काम धंधे प्रभावित हो जाते हैं। जहां तक माइग्रेशन की बात है तो इसमें कमी आई है। राज्य में ही लोगों को मौके मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पंजाब के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखवीर सिंह बादल ने इस बात की चर्चा की थी कि कम बिहारी मजदूर आने से वहां के खेती किसानी बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। भूटान के प्रधानमंत्री ने भी यही बात भूटान यात्रा के दौरान कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देश और विदेश में रह रहे बिहारियों के लिए संवदेनशील है। कहीं भी अगर बिहारियों पर कोई अत्याचार होता है, तो राज्य सरकार तुरंत इस पर संबंधित राज्य सरकार से बात कर उनकी समस्या का समाधान करवाती है। राज्य सरकार श्रमिकों के लिए कई तरह की योजनाएं चल रही है। उनके लिए बीमा का प्रावधान किया गया है। देश से बाहर काम करने वाले बिहारियों के लिए भी प्रवासी योजना बनाई गई है।

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