दस बार सांसद रहे पूर्व लोकसभाध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी नहीं रहे

 68 



लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष 89 वर्षीय सोमनाथ चटर्जी का सोमवार सुबह करीब 8:15 बजे कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. उनके कई अंगों ने काम करने बंद कर दिया था. चटर्जी अपने पीछे पत्नी रेणु चटर्जी तथा दो बेटियां छोड़ गये हैं.
सोमनाथ चटर्जी वर्ष 2004 से 2009 तक लोकसभा के अध्यक्ष रहे. माकपा ने संप्रग-1 सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बावजूद चटर्जी ने लोकसभा के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था. इस वजह से इन्हें वर्ष 2008 में माकपा से निष्कासित कर दिया गया था.
राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष तथा सदन में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने वाले वरिष्ठ सांसद श्री सोमनाथ चटर्जी के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ. बंगाल और पूरे भारत ने एक संवेदनशील लोक सेवक खो दिया है. उनके परिवार और अनगिनत चाहने वालों के प्रति मेरी शोक-संवेदनाएं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्विटर पर लिखा- “श्री सोमनाथ चटर्जी भारतीय राजनीति के दिग्गज थे. उन्होंने संसदीय लोकतंत्र को समृद्ध किया तथा गरीबों व कुचलों के कल्याण हेतु सशक्त आवाज़ बने रहे. उनके निधन से दुःखी हूं. मेरी संवेदनाएं उनके परिवार तथा समर्थकों के साथ हैं.”
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चटर्जी के निधन पर शोक जताते हुए ट्वीट कर कहा- ‘दस बार सांसद रहे पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्री सोमनाथ चटर्जी के निधन पर मैं दुखी हूं. वह अपनेआप में एक संस्थान थे. सभी दलों के सांसद उनका सम्मान और प्रशंसा करते थे. दुख के इस क्षण में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं.’
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्विटर पर लिखा- “सोमनाथ दा के निधन से दुखी हूं. यह हम सभी के लिए बड़ी हानि है.”


सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई 1929 को असम के तेजपुर में हुआ था. उनके पिता का निर्मल चंद्र चटर्जी और मां का नाम वीणापाणि देवी था. सोमनाथ चटर्जी के पिता अखिल भारतीय हिंदू महासभा के संस्थाकों में से थे एक थे और पेश से वकील थे. चटर्जी ने कोलकाता और ब्रिटेन में पढ़ाई की. ब्रिटेन के मिडिल टैंपल से लॉ की पढ़ाई करने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट में वकालत की. प्रखर वक्ता के तौर पर लोगों की नजरों में आ चुके चटर्जी ने बाद में राजनीति में आने का फैसला किया.
सोमनाथ चटर्जी का राजनीतिक जीवन विरोधाभाषों के साथ शुरू हुआ. उनके पिता जहां दक्षिणपंथी राजनीति में थे तो सोमनाथ ने केरियर की शुरुआत सीपीएम के साथ 1968 में की. 1971 में पहली बार सांसद चुने जाने के बाद 2004 में वह 10वीं बार लोकसभा के लिये चुने गये. इस बीच वो इस बीच वो बर्धमान, जादवपुर और बोलपुर से लोकसभा सांसद रहे. हाँलाकि इस दौरान 1984 में जादवपुर में ममता बनर्जी से उन्हें करारी हार का सामना भी करना पड़ा.1996 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 2004 में 14वीं लोकसभा के लिये उन्हें सभी दलों की सहमति से लोकसभा का अध्यक्ष चुना गया. राजनीति में सोमनाथ चटर्जी एक बहुत ही सम्मान नेता के तौर पर देखा जाता है.
सोमनाथ चटर्जी CPI(M) के केंद्रीय समिति के सदस्य रहे थे, और उन्हें प्रकाश करात के धुर विरोधी के रूप में जाना जाता रहा है. चटर्जी अपने उसूलों के पक्के थे और इन्हीं उसूलों के खातिर एक बार अपनी ही पार्टी के खिलाफ खड़े हो गए. जब सीपीएम ने भारत-अमेरिका न्यूक्लियर समझौता विधेयक के विरोध में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया और पार्टी ने चटर्जी को स्पीकर का पद छोड़ने को कहा. सोमनाथ ने पार्टी का आदेश नहीं माना क्योंकि इसको लेकर उनका कहना था कि लोकसभा अध्यक्ष के पद पर विराजमान व्यक्ति किसी दल का नहीं होता है.

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए Pileekhabar के Facebook पेज को लाइक करें

loading...


Loading...



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *