तृप्ति देसाई और उनके पति पर पर पुणे के हिंजवाड़ी थाने में एक दलित सामाजिक कार्यकर्ता ने मारपीट और लूटपाट का मामला दर्ज कराया है। वहीं शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिलाने वाली तृप्ति ने मामले को झूठा और फंसाने वाला बताया।
हिंजवडी पुलिस में दर्ज़ मामले के अनुसार 27 जून को अहमदनगर के दलित सामाजिक कार्यकर्ता विजय अन्नासाहेब मकासरे अपनी कार से जा रहे थे, तभी बालेवाड़ी में तृप्ति देसाई ने प्रशांत देसाई सतीश देसाई, कांतीलाल गवारे अपने अन्य दो साथियों के साथ मिलकर उन्हें रोका और लाठी-डंडे से उनकी पिटाई करने लगे। इस दौरान प्रशांत ने उनके 27 हजार रुपये और सोने की चेन भी लूट ली। मकासरे के अनुसार मारपीट के बाद तृप्ति देसाई से उनसे कहा कि अगर मामला पुलिस तक गया तो वो उन्हें झूठे केस में फंसा देंगी।


मकसरे ने कहा कि वो पिछले एक साल से तृप्ति देसाई के संपर्क में हूं। मुझे इसी साल 24 मई को एक पत्र मिला था जिसमें मुझे भूमाता ब्रिगेड के राज्य उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। वहीं तृप्ति देसाई ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि इस तरह की किसी घटना में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उनके खिलाफ झूठा आरोप लगाया गया है।
भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक अध्यक्ष तृप्ति देसाई एक सामजिक कार्यकर्ता हैं। महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर स्थित प्रसिद्ध शनि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और पूजा के अधिकार को लेकर आंदोलन किया और प्रवेश दिलवाया। इसके अलावा हाजी अली दरगाह और नासिक के कपालेश्वर,त्रयंबकेश्वर मंदिर और कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश देने की मांग को लेकर भी आंदोलन कर चुकी हैं। तृप्ति देसाई प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे के साथ भी कई सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुकी हैं।

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