दलित संगठनों का भारत बंद हिंसात्मक रहा, दस लोगों की हुई मौत

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एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलितों के भारत बंद का असर पुरे देश में देखा गया. बंद के दौरान करीब 100 ट्रेनों की सेवाएं भी प्रभावित हुईं. हिंसक झड़पों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश में 6, यूपी में दो, बिहार और राजस्थान में एक-एक कुल दस मौत की खबर है. मध्यप्रदेश, राजस्थान और पश्चिमी उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा हिंसा हुई. जिन दस राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हुए वहां की 71 लोकसभा सीटों पर एससी/एसटी वोटर असरकारक डालते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के एक मामले में सुनवाई के दौरान 20 मार्च को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के दुरुपयोग को रोकने को लेकर गाइडलाइन जारी की थी.जिसके अनुसार सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत से होगी, आरोपी सरकारी कर्मचारी नहीं होंगे तो उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से होगी. अग्रिम जमानत के मामले में मजिस्ट्रेट विचार कर अपने विवेक से जमानत मंजूर या नामंजूर करेंगे.
एनसीआरबी 2016 की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में जातिसूचक गाली-गलौच के 11,060 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 935 जांच में झूठी पाई गईं. दलित संगठनों की मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करे और जो नियम पहले थे, वे यथावत लागू रहें. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एससी/एसटी एक्ट के फैसले पर फिर से विचार करने के लिए एक याचिका दायर की है, जिसपर फौरन सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है.
भारत बंद के दौरान प्रदर्शनकारी कई जगह रेल की पटरियों पर बैठ गए जिससे करीब 100 ट्रेनों की सेवाएं प्रभावित हुईं, कई मालगाड़ियों को भी रोका गया. प्रदर्शनकारियों ने राजस्थान, ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में रेल यातायात को जाम किया. पूर्व मध्य रेलवे की करीब 43 ट्रेनें, आगरा रेल मंडल में 28 ट्रेनें और उत्तर पूर्व रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे और उत्तर पूर्व फ्रंटियर रेलवे में करीब 28 ट्रेनें प्रभावित हुयीं.


मध्यप्रदेश के ग्वालियर, भिंड और मुरैना में भारी हिंसा हुई. पांच थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है, इंटरनेट बंद कर दिया गया है. ग्वालियर में सुरक्षा व्यवस्था हाशिये पर रही, जहाँ एक शख्स रिवॉल्वर से फायरिंग करता रहा और पुलिस असहाय दिखी. कई जगह सड़क पर वाहन जलाए गए. हिंसा के दौरान ग्वालियर में दो, भिण्ड में दो, डबरा में एक और मुरैना में एक की मौत हुयी है. इसके अलावे इंदौर, सिवनी, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ और जबलपुर में भी बंद असरदार रहा. प्रदेश में इसी वर्ष चुनाव हैं.
राजस्थान के अलवर जिले के खैरथल में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई. बाड़मेर में 25 लोग जख्मी हो गए. कई स्थान पर वाहनों में तोड़फोड़ की गई, पुलिस गाड़ी में आग लगा दी गयी. यहाँ भी इसी वर्ष चुनाव होने हैं.
बिहार के आरा, भागलपुर, मधुबनी और अररिया में ट्रेनें रोकी गयीं, मोतिहारी में तोड़फोड़ हुयी. वैशाली में प्रदर्शनकारियों के जाम में एंबुलेंस फंसने के कारण एक नवजात की मौत हो गई. झारखंड में प्रदर्शनकारियों ने जबरन बाजार बंद कराए. सड़कों पर यातायात बाधित करने के साथ ही कई जगहें ट्रेनें रोकी गईं. रांची में पुलिस पर पथराव हुआ.
यूपी के मुजफ्फरनगर में एक शख्स की मौत हो गयी, तीन जख्मी हो गए. बिजनौर में एक बीमार व्यक्ति की रैली के दौरान फंसने से मौत गई. मेरठ, गोरखपुर, सहारनपुर, हापुड़, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मथुरा और आगरा समेत कई जिलों में प्रदर्शनकारियों उत्पात दिन भर जारी रहा. कई स्थान पर प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ करने के साथ ही वाहनों और पुलिस थाने में भी आग लगाई, दमकल टीम पर भी पथराव किया गया.
छत्तीसगढ़ में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और भिलाई समेत राज्य में बंद का व्यापक असर देखने को मिला. राज्य के कई जिलों में प्रदर्शनकारियों ने जबरन बाजार बंद कराए. हरियाणा में नेशनल हाइवे एक बंद कर रहा. ट्रेन पर पथराव हुआ, रोडवेज डिपो में तोड़फोड़ हुई. पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, पुलिस फायरिंग में दस लोग घायल हुए, पथराव में पचास पुलिसकर्मी जख्मी हुए.

गुजरात के पाटन, हिम्मतनगर, थराद, नवसारी, भरूच, जूनागढ़, धानेरा, भावनगर, जामनगर, अमरेली, तापी, साणंद सहित अन्य इलाकों में रैलियां निकाली गईं. अहमदाबाद में बस सर्विस बंद रही. कई जगह पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ हुआ. पंजाब के सभी स्कूल-कॉलेज, यूनिवर्सिटी और बैंक बंद रहे. सीबीएसई की परीक्षाएं टाल दी गयीं, बसें और इंटरनेट बंद रखे गए. दिल्ली – लाहौर बस सेवा भी बाधित रही. ओडिशा में भी बंद असरदार रहा, प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनें भी रोकीं. प्रदर्शनकारियों ने महाराष्ट्र में राज्य परिवहन की बसों पर पथराव किया.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ट्वीट किया- दलितों को भारतीय समाज के सबसे निचले पायदान पर रखना RSS/BJP के DNA में है. जो इस सोच को चुनौती देता है उसे वे हिंसा से दबाते हैं. हजारों दलित भाई-बहन आज सड़कों पर उतरकर मोदी सरकार से अपने अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं, हम उनको सलाम करते हैं. कांग्रेस ने कहा कि निश्चित ही सरकार को रिव्यू पिटीशन दायर करनी चाहिए, यह सरकार का हक है. पर असल सवाल यह है कि सरकार इस केस को सुप्रीम कोर्ट में ठीक ढंग से पेश करने में नाकाम क्यों रही?
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर करने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी है. उन्होंने उन आरोपों को भी निराधार बताया जिनमें राजग सरकार के पिछड़े समुदायों के उत्थान के खिलाफ होने की बात कही गई थी. साथ ही कहा कि यह सुनिश्चित करना राजनीतिक पार्टियों की नैतिक जिम्मेदारी है कि कहीं भी कोई जातीय या सांप्रदायिक हिंसा न हो.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से शांति बनाये रखने की अपील करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति ना पैदा हो जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो. हमारी संवेदना एससी-एसटी और वंचित तबकों के प्रति है, उनके उत्थान और सुरक्षा के हमारी सरकारें पूरी संजीदगी के साथ युद्धस्तर पर काम कर रही हैं.

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