तीन बैंकों का विलय; वैश्विक स्तर के बैंक बनाने की दिशा में ठोस कदम

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बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के महाविलय की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद देश में तीसरे बड़े बैंक के अस्तित्व में आने के साथ ही देश में सरकारी बैंकों की संख्या और कम हो जाएगी. हालांकि अभी इस नए बैंक को आस्तित्व में आने में कम से कम 6 माह का वक्त लगेगा. इन, तीनों बैंकों का विलय करके एक नया बैंक बनाया जाना है.
विलय की घोषणा के बाद बीएसई पर बैंक ऑफ बड़ौदा की मार्केट वैल्यूएशन 5726.62 करोड़ रुपये घटकर 30013.38 करोड़ रुपये और विजया बैंक की मार्केट कैप घटकर 7355.39 करोड़ रुपये हो गई है. वहीं दूसरी ओर देना बैंक के शेयर्स 19.75 फीसद की बढ़त के साथ 19.10 रुपये पर कारोबार कर बंद हुये. इन तीनों बैंकों को मिलाकर जो बैंक बनेगा, उसका आकार 14.82 लाख करोड़ रुपये का होगा और वह SBI तथा PNB के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा.


केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस संदर्भ में कहा कि इससे बैंक और मजबूत होंगे तथा उनकी उधार देने की क्षमता बढ़ेगी. जेटली की अध्यक्षता वाले अल्टरनेटिव मैकेनिज्म यानी मंत्रियों के एक समूह ने यह निर्णय लिया है. इस समूह में रेल मंत्री पीयूष गोयल और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण शामिल थे. ज्ञात है कि यह पहला मौका है, जब तीन बैंकों के एकीकरण की पहल सरकार ने की है.
सरकार ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब फंसे कर्ज की मार झेल रहे देना बैंक का शुद्ध NPA अनुपात 11 फीसद से अधिक हो गया है और रिजर्व बैंक ने इसे PCA यानी प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन श्रेणी में डाल दिया है और ऐसे में इस बैंक पर कई तरह की बंदिशें लग गई हैं. विलय के बाद इन तीनों बैंकों के ग्राहकों को नए बैंक में अपना फिर से खाता खोलना होगा और एक बार फिर से केवाईसी की प्रक्रिया को दोहराना होगा. जिसके बाद ही ग्राहकों को नई चेकबुक, एटीएम कार्ड और पासबुक मिलेगी.
सरकार ने इस विलय का ऐलान करते हुए छोटे-छोटे बैंकों को मिलाकर वैश्विक स्तर के कुछ बैंक बनाने की दिशा में एक और ठोस कदम बढ़ा दिया है और इस विलय से सरकारी बैंकों की संख्या 21 से घटकर 19 रह जाएगी.

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