तीन तलाक बिल को मोदी कैबिनेट की मंजूरी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में कैबिनेट ने मुस्लिम महिला विवाह अधिकारों का संरक्षण बिल (ट्रिपल तलाक बिल) को मंजूरी दे दी. संसद के शीतकालीन सत्र में यह बिल सरकार का मुख्‍य एजेंडा होगा.
गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अध्‍यक्षता में बने मंत्री समूह ने सलाह मशवरे के बाद बिल का ड्राफ्ट तैयार किया था. अगस्‍त में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक इस बिल में तुरंत ट्रिपल तलाक को आपराधिक करने के लिए कड़े प्रावधान शामिल किये गए हैं. इस मंत्री समूह में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद और विधि राज्यमंत्री पीपी चौधरी सदस्य थे.

यह बिल एक बार में तीन तलाक या ‘तलाक ए बिद्दत’ पर लागू होगा और यह पीड़िता को अपने तथा नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा. पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है और मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेंगे.
इसके अनुसार किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर, ईमेल, SMS या व्हाट्सएप किसी भी माध्यम से) गैरकानूनी होगा. यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध होगा. एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी और शून्य होगा और ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा भी हो सकती है. जो जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होगा.
तलाक और विवाह का विषय संविधान की समवर्ती सूची में आता है और सरकार आपातकालीन स्थिति में इस पर कानून बनाने में सक्षम है, लेकिन सरकारिया आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राज्यों से सलाह करने का फैसला किया है.
इस बिल को शुक्रवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा. पिछले दिनों गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि यह भारत के लोगों की मजबूत इच्छा है कि संसद तीन तलाक और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग इन दोनों मुद्दों पर कानून बनाए और सरकार इस इच्छा को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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