तीन तलाक असंवैधानिक, संसद 6 महीने में कानून बनाए : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार देते हुए केंद्र सरकार से कहा है कि इस मामले में वह संसद में कानून बनाए।
मुसलमानों में प्रचलित तीन तलाक की वैधानिकता पर अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीन दो के बहुमत से फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि तीन तलाक असंवैधानिक है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि इस मामले में वह संसद में कानून बनाए।
जस्टिस कुरियन जोसेफ़, जस्टिस आरएएफ़ नारिमन और जस्टिस यूयू ललित ने एक बार मे तीन तलाक को असंवैधानिक ठहराया और इसे खारिज कर दिया। तीनों जजों ने 3 तलाक को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करार दिया। जजों ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है।
मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने कहा ये 1400 साल पुरानी प्रथा और मुस्लिम धर्म का अभिन्न हिस्सा। कोर्ट नहीं कर सकता रद्द। चीफ जस्टिस खेहर और जस्टिस नजीर ने अल्पमत में दिए फैसले में कहा कि तीन तलाक धार्मिक प्रैक्टिस है, इसलिए कोर्ट इसमें दखल नहीं देगा। दोनों ने कहा कि तीन तलाक पर छह महीने का स्टे लगाया जाना चाहिए, इस बीच में सरकार कानून बना ले और अगर छह महीने में कानून नहीं बनता है तो स्टे जारी रहेगा। हालांकि दोनों जजों ने माना कि यह पाप है।


कोर्ट के निर्णय पर सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि यह मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में अच्छा फैसला है। इस मामले की शुरुआत तब हुई थी जब उत्तराखंड के काशीपुर की शायरा बानो ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर तीन तलाक और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। कोर्ट के फैसले पर याचिकाकर्ता शायरा बानो ने फैसला अपने पक्ष में आने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समय बदल गया है और अब केंद्र सरकार एक समान कानून जरूर बनायेगी।
इसके पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर की पीठ ने एक बार में तीन तलाक की वैधानिकता पर बहस की सुनवाई की थी। इस पीठ की खासियत यह थी कि इसमें पांच विभिन्न धर्मों के अनुयायी न्यायमूर्ति शामिल रहे, हालांकि यह बात मायने नहीं रखती, क्योंकि न्यायाधीश का कोई धर्म नहीं होता। कोर्ट ने शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि वह फिलहाल एक बार में तीन तलाक पर ही विचार कर रहा है, बहुविवाह और निकाह-हलाला पर बाद में विचार किया जाएगा।
इस विषय पर सुनवाई कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेकर शुरू की थी, लेकिन बाद में छह अन्य याचिकाएं भी दाखिल हुईं, जिसमें से पांच में तीन तलाक को रद करने की मांग की गयी थी। मामले में तीन तलाक का विरोध कर रहे महिला संगठनों और पीड़िताओं के अलावा सुनवाई का विरोध कर रहे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत ए उलेमा ए हिंद की ओर से भी दलीलें रखी गईं थीं। केंद्र सरकार ने भी महिलाओं के साथ भेदभाव बताते हुए इसे रद्द करने की मांग के पक्ष में अपनी राय रक्खी थी।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें थीं कि कुरान में तीन तलाक का जिक्र नहीं है। यह गैरकानूनी और असंवैधानिक है। तीन तलाक महिलाओं के साथ भेदभाव है. इसे खत्म किया जाए। महिलाओं को तलाक लेने के लिए कोर्ट जाना पड़ता है जबकि पुरुषों को मनमाना हक दिया गया है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत की दलीलें थीं कि तीन तलाक अवांछित होते हुए भी वैध है। यह पर्सनल लॉ का हिस्सा है, कोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता। पर्सनल लॉ को मौलिक अधिकारों की कसौटी पर नहीं परखा जा सकता। पर्सनल लॉ में तीन तलाक को मान्यता दी गई है। तलाक के बाद उस पत्नी के साथ रहना पाप है। धर्मनिरपेक्ष अदालत इस पाप के लिए मजबूर नहीं कर सकती। 1400 साल से चली आ रही प्रथा है। यह आस्था का विषय है, संवैधानिक नैतिकता और बराबरी का सिद्धांत इस पर लागू नहीं होगा।
केंद्र सरकार की दलीलें थीं कि तीन तलाक महिलाओं को संविधान में मिले बराबरी और गरिमा से जीवन जीने के हक का हनन है। धार्मिक आजादी का अधिकार बराबरी और सम्मान से जीवन जीने के अधिकार के अधीन है। यह धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं है, इसलिए इसे धार्मिक आजादी के मौलिक अधिकार में संरक्षण नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट मौलिक अधिकारों का संरक्षक है। कोर्ट को विशाखा की तरह फैसला देकर इसे खत्म करना चाहिए। अगर कोर्ट ने हर तरह का तलाक खत्म कर दिया तो सरकार नया कानून लाएगी। पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित 22 मुस्लिम देश इसे खत्म कर चुके हैं।
कोर्ट की टिप्पणियां थीं कि जो चीज ईश्वर की नजर में पाप है वह इंसान द्वारा बनाए कानून में वैध कैसे हो सकती है? क्या तीन तलाक इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है? क्या निकाहनामे में महिला को तीन तलाक को न कहने का हक दिया जा सकता है? अगर हर तरह का तलाक खत्म कर दिया जाएगा तो पुरुषों के पास क्या विकल्प होगा?

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