बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले का गांव सुजानपुरा में आजादी के 70 साल बाद भी जातियों के नाम पर भेदभाव हो रहा है. यहां जाति के आधार पर पानी तक का बंटवारा कर दिया गया है.
सुजानपुरा में तीन जातियों के लिए तीन अलग-अलग कुएं हैं. एक जाति विशेष के कुएं से अगर दूसरी जाति का व्यक्ति पानी भर ले तो उसके साथ मारपीट हो जाती है.
गांव का अहिरवार समाज वंशकार जाति को अछूत मानता है. ऐसे में वह अपने कुएं से उन्हें पानी नहीं भरने देता. गांववालों के अनुसार यहां सालों- साल से यही व्यवस्था चली आ रही है. यहाँ दबंगों का ऐसा आतंक है कि सूखा पड़े या कोई भी और प्राकृतिक विपत्ति आए, यहाँ की स्थापित परंपरा कोई नहीं तोड़ सकता.
इन दोनों के अलावा अन्य जातियों के लिए एक अलग कुआं है. उस तीसरे कुएं से अहिरवार और वंशकार समाज के लोग पानी नहीं भर सकते. यहाँ वंशकार समाज अगर अहिरवार समाज के कुएं से पानी भर ले तो कुएं में गंगाजल डालकर उसे शुद्ध किया जाता है और दोषी को पंचायत दंडित भी करती है.



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