डोकलाम के बाद चीन पड़ोसियों से बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने को तैयार

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन अपने पड़ोसियों से जितने भी विवाद हैं, उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाने को तैयार है। प्रेसिडेंट जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी की 19वीं कांग्रेस में करीब साढ़े तीन घंटे की स्पीच दी। इसमें उन्होंने चीन से जुड़े तमाम मसलों का जिक्र किया। पांच साल में होने वाली इसी कांग्रेस के जरिए ही चीन का प्रेसिडेंट चुना जाता है। जिनपिंग का अगले पांच साल के लिए फिर प्रेसिडेंट चुना जाना तय माना जा रहा है। इसका एलान अगले हफ्ते होगा। बहरहाल, जिनपिंग का पड़ोसी देशों को लेकर पार्टी कांग्रेस में दिया गया बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत और चीन के बीच हाल में डोकलाम मुद्दे पर टकराव 72 दिन चला था।
भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर सीमा विवाद बातचीत के जरिये सुलझ गया। इसमें दोनों देशों के प्रमुखों भारत के PM नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने प्रमुख भूमिका निभाई। चिनफिंग अब जल्द ही चीन के राष्ट्रपति के रूप में दूसरी पारी शुरु करने वाले हैं और उन्होंने एक बार फिर विवादों का हल बातचीत से निकालने का बयान दिया है। हालांकि इस बयान में चीन की अकड़ पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। शी चिनफिंग ने आशंकित पड़ोसियों के साथ विवाद बातचीत के जरिये सुलझाने का भरोसा देने के साथ ही कहा कि यह देश के सामरिक हितों की कीमत पर नहीं होगा।

शी ने यह बात चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक की शुरुआत करते हुए कही, जिसमें अगले पांच साल के उनके दूसरे कार्यकाल की पुष्टि के साथ ही उनके साथ काम करने के लिए नये नेताओं का निर्वाचन होना है। सप्ताह भर चलने वाली बैठक में पार्टी के संविधान का संशोधन भी किया जाना है। शी ने कहा कि चीन कभी अन्य के हितों की कीमत पर अपने विकास को आगे नहीं बढ़ाएगा, न ही अपने वैध अधिकार और हितों को छोड़ेगा। किसी को भी यह आशंका नहीं होनी चाहिए कि चीन वह सब कुछ निगल लेगा जो उसके हितों को कमजोर करता है। बैठक में करीब 2300 लोगों ने हिस्सा ले रहे हैं।
चीन और भारत के बीच हाल में सिक्किम क्षेत्र में गतिरोध उत्पन्न हो गया था, इसके साथ ही चीन का दक्षिण और पूर्वी चीन सागरों में भी पड़सियों के साथ समुद्री विवाद है। इस पर शी ने पड़ोसी देशों के बारे में कहा कि ‘‘चीन सौहार्द, ईमानदारी, पारस्परिक लाभ और समावेश के सिद्धांत और साझेदारी और मित्रता बनाने की नीति पर पड़ोसियों के साथ अपने संबंधों को मजबूती प्रदान करेगा।’’
शी जिनपिंग ने कहा कि ‘‘हमें विवादों को बातचीत और चर्चा से सुलझाने की प्रतिबद्धता जतानी चाहिए और पारंपरिक व गैर पारंपरिक खतरों पर अपनी प्रतिक्रिया समन्वित करनी चाहिए, साथ ही आतंकवाद के सभी स्वरूपों का विरोध करना चाहिए।’’ ज्ञात है कि इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी आतंकवाद के सभी स्वरूपों का विरोध करने की बात संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण में कर चुकी है।
चीन के राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी आफ चाइना (CPC) के महासचिव 64 वर्षीय शी जिनपिंग ने पांच वर्ष में एक बार होने वाली कांग्रेस में अपने साढ़े तीन घंटे के संबोधन में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को एक विश्व श्रेणी की सेना बनाने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि हमारी आर्म्ड फोर्सेस का मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम 2035 तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद हमारी सेना वर्ल्ड क्लास हो जाएगी। जिनपिंग ने 2012 में चीन के प्रेसिडेंट बनने के बाद 141 बिलियन डॉलर के बजट से PLA का मॉर्डनाइजेशन शुरू किया था। चीन का डिफेंस बजट अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है।

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