जेडीएस कर्नाटक में किंग मेकर की भूमिका में रहेगी : सर्वे

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एक ओपिनियन पोल के अनुसार कर्नाटक में जेडीएस किंग मेकर की भूमिका में नजर आ रही है. वहाँ भाजपा को बढ़त जरुर है पर वो बहूमत से दूर है, कांग्रेस भाजपा में वहाँ कांटे की टक्कर नजर रही है.
कर्नाटक में सियासी संग्राम का पारा नापने के लिए JAIN- लोकनीति CSDS ने 13 से 18 अप्रैल के बीच 56 विधानसभा सीटों के 224 बूथों पर जाकर 3737 लोगों से बात के जरिये ओपिनियन पोल किया है. इसके अनुसार 37 फीसदी के साथ अभी भी कांग्रेस सबसे आगे है, जिसे 35 फीसदी वोट शेयर के साथ भाजपा कड़ी टक्कर दे रही है. वहीँ जेडीएस+ को 20% और अन्य को 8% वोट मिलता दिख रहा है. ओपिनियन पोल के अनुसार मुख्यमंत्री के रूप में 30% लोगों की पहली पसंद अभी भी वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हैं. वहीं 25% लोग येदियुरप्पा और 20% लोग एचडी कुमारस्वामी को अपनी पहली पसंद बताते हैं.


ओपिनियन पोल के अनुसार कर्नाटक में बीजेपी का वोट शेयर भले ही कम हो लेकिन सीटों के मामले में वो कांग्रेस से आगे नजर आ रही है. उसे 89 से 95 सीटें मिलती नजर आ रही हैं जबकि कांग्रेस को 85 से 91 सीटें मिलती लग रही हैं, जेडीएस+ को 32 से 38 तथा अन्य को 6 से 12
सीटें मिलने की संभावना है. कर्नाटक में बहुमत के लिए 113 सीटें चाहिए यानी जेडीएस किंगमेकर के रूप में उभरती नजर आ रही है.
कर्नाटक चुनाव में दो स्थानीय मुद्दों पर भी ओपिनियन पोल ने राय इकटठी की है. पहला कि लिंगायत समाज चुनाव में किसे वोट देगा और दूसरा कर्नाटक में अलग झंडे का कितना समर्थन है. ओपिनियन पोल में लिंगायत समाज भाजपा के साथ नजर आया. सर्वे के मुताबिक इस समाज के 60 फीसदी लोग भाजपा और 23 फीसदी लोग कांग्रेस के साथ हैं. वहीं कर्नाटक के लिए अलग झंडे का 58% लोगों ने समर्थन किया जबकि 28% ने इसके विरोध में अपनी राय दी.
किसी राज्य में चुनाव हो और भाजपा नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के लोकप्रियता की बात न हो, वर्तमान में यह असम्भव लगता है. इस मामले में ओपिनियन पोल के अनुसार 43% लोगों की पसंद PM मोदी तो 28% लोगों की पसंद राहुल गाँधी हैं. कर्नाटक में चुनाव से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंदिर-मंदिर का चक्कर लगा रहे हैं और कांग्रेस ने लिंगायत कार्ड भी चला है. वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. केंद्र सहित देश के 20 राज्यों की सत्ता पर सवार NDA कर्नाटक का किला फतह करने के प्रति आश्वस्त है तो वहीं कांग्रेस अपने इस राज्य को बचाने में कोई कोर- कसर नहीं छोड़ना चाहती है.

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