इसरो के भूस्थैतिक प्रक्षेपण यान जीएसएलवी – एफ 11 ने देश के नवीनतम उपग्रह जीसैट – 7 ए को उसकी कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश करा दिया. यह उपग्रह वायुसेना की संचार प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाएगा.
जीसैट 7 – ए को प्रक्षेपित करने के लिए 26 घंटों की उलटी गिनती मंगलवार दोपहर दो बज कर 10 मिनट पर शुरू हुई थी और जीएसएलवी – एफ 11 रॉकेट श्रीहरिकोटा के उपग्रह प्रक्षेपण स्थल से शाम चार बज कर 10 मिनट पर रवाना हुआ. प्रक्षेपण होने के करीब 19 मिनट बाद जीएसएलवी – एफ 11 ने जीसैट – 7 ए को इसकी लक्षित कक्षा में प्रवेश करा दिया. इनमें मौजूद प्रणोदक प्रणाली के जरिए इसे इसकी निर्धारित भूस्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मुताबिक उपग्रह को रॉकेट से अलग होने के बाद अपने निर्धारित कक्षीय स्थान पर पहुंचने में कुछ दिनों का वक्त लगेगा. जीएसएलवी-एफ 11 यान एक उन्नत संस्करण है जहां वैज्ञानिकों ने पेलोड क्षमता को बढ़ाने के लिए क्रायोजेनिक स्तर तथा दूसरे स्तर में बदलाव किये हैं. इसरो के चेयरमैन के सिवन ने के अनुसार स्वदेश निर्मित क्रायोजेनिक स्टेज के साथ यह देश का सबसे भारी उपग्रह रहा है. इसरो को सभी नये परिवर्तनों और सफल प्रक्षेपण के लिए चारो ओर से बधाई मिल रही है.
विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक एस सोमनाथ ने कहा कि इसरो इस सफल प्रक्षेपण के बाद भविष्य में अपने जियोसिंक्रोनस प्रक्षेपण यान (GSLV) पर और भी भारी उपग्रह भेजेगा. GSLV में हमेशा और सुधार की गुंजाइश होती है और आगामी GSLV-F 12 मिशन में हम और भी बड़े पेलोड कंपार्टमेंट बनाने जा रहे हैं ताकि बड़े अंतरिक्षयानों को उन पर सवार किया जा सके.
उन्होंने कहा कि यह हमारे सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है और वैज्ञानिक इस बदलाव के लिए तैयार हैं. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि GSLV बहुत सफल और मजबूत बना रहे, जैसा कि इसरो का विश्वस्त प्रक्षेपण यान पीएसएलवी है.



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