जीतन राम मांझी का उद्देश्य दलित, पिछड़ों, बंचितों और अल्पसंख्यकों की खुशहाली मात्र : फैज़

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जदयू और भाजपा गठबंधन की सरकार नीतीश कुमार या भाजपा के हीत में न होकर बिहार के हीत में है. इस सरकार से प्रदेश के लोगों की अपेक्षायें पूरी होंगी. प्रदेश को एक भयमुक्त सरकार मिलेगी और विकास की रफ्तार में अप्रत्याशित वृद्धी होगी.
हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्युलर के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष फैज़ आशिक सिद्दकी ने कहा कि जदयू का NDA में आना बिहार के लिए एक शुभ संकेत है. शराबबंदी के बाद एक ओर प्रदेश की आय घट गयी थी तो वहीँ वित्तीय कुप्रबंधन अपने चरम पर था. महागठबंधन सरकार के कारण प्रदेश की वित्तीय स्थिति चरमरा गयी थी. फलस्वरूप प्रदेश में विकाश का पहिया थम गया था. प्रदेश में घोर अराजक स्थिति बन गयी थी.


भाजपा के वरिष्ट नेता सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में 2005 में जब प्रदेश के वित्त मंत्री का कार्यभार सम्हाला था तो एक जर्जर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में सफल हुए और प्रदेश 10 प्रतिशत से भी ज्यादा तेज़ गति से विकास पथ पर आगे बढने लगा. जबकि पिछले दिनों विकास की कौन कहे, विभाग आवंटित राशि तक नहीं खर्च कर पा रहे थे. कई विभाग वर्ष के चार माह बीत जाने पर भी एक रुपया विकास कार्य में नहीं खर्च कर पाए.
प्रदेश में किसानों की स्थिति दयनीय हो गयी थी. कृषि विभाग की योजनाओं का कोई लाभ किसानों को नहीं मिल रहा था. कई योजनाओं में तो एक- डेढ़ वर्षो से अनुदान दिए ही नहीं गये. शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में भी अंधेरनगरी मची हुयी थी. पथ निर्माण की सारी योजनायें दो- तीन जिलों तक सिमट कर रह गयी थी. चारों ओर भय और लूट का माहौल था.
नई सरकार के गठन के दिन ही स्पष्ट हो गया की यह सरकार मूल्यों की सरकार है. एक ओर जहाँ महागठबंधन की सरकार में मंत्री पद के लिए और उसपर जमे रहने के लिए लोग, कुछ भी करने, किसी भी स्तर तक जाने वाले थे, वंही इस सरकार में मंत्री पद मिलने के बाद भी सहजता से बाहर रहने वाले लोग हैं.

सिद्दकी ने कहा कि हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी एक महान व्यक्तित्व के मालिक हैं. इनमें पद की लालसा कभी भी नहीं रही. NDA के सबसे बड़े घटक भाजपा के तमाम बड़े नेताओं ने उनसे मंत्री पद की शपथ लेने को कहा, पर इतिहास गवाह है कि मांझीजी के जीवन का उद्देश्य दलित, पिछड़ों, बंचितों और अल्पसंख्यकों की खुशहाली मात्र रही है. मुख्यमंत्री के तौर पर मात्र नौ माह का उनका कार्यकाल इसका गवाह रहा है.
सिद्दकी ने कहा कि मांझीजी ने अपने मुख्यमंत्रीत्व काल में अल्पसंख्यकों के लिए अपने सारे दरवाजे खोल दिए थे, टिकट बंटवारे में भी अल्पसंख्यकों को तरजीह दिया और भाजपा के साथ NDA में रहते हुए भी भाजपा नेताओं के उन तमाम बयानों का पुरजोर विरोध किया जो मुसलमानों के विरुद्ध आये.

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