छत्तीसगढ़ में बलरामपुर जिला के जिलाधिकारी अवनीश शरण ने अपनी 5 वर्षीय बेटी वेदिका शरण को प्राम्भिक शिक्षा आंगनबाड़ी केंद्र में दिलवाने के बाद उसका नामांकन एक सरकारी विद्यालय में कराकर पूरी स्कूली व्यवस्था को चुस्त- दुरुस्त करने का अनूठा- अनोखा और सराहनीय प्रयास किया है।
देश के सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को कोसने और उसमें सुधार लाने की माँग सभी करते हैंl कई बार यह बात भी सामने आयी कि सरकारी पदाधिकारी, कर्मचारी व तमाम जनप्रतिनिधि अपने बच्चों का नामांकन सरकारी विद्यालयों में कराएं तो वहाँ की व्यवस्था में गुणात्मक सुधर हो सकता हैl साथ ही विद्यालयों पर आमजन का विश्वास भी पुनः कायम हो पायेगा, वहाँ होने वाली अनियमिततायें कम होंगी, समाप्त होने की ओर अग्रसर होंगी।
कुछ वर्ष पूर्व सभी बच्चे एक साथ सरकारी विद्यालय में पढ़ते थे। लोग इसे विद्या का मंदिर समझते थे, प्रबुद्ध वर्ग का पूरा ध्यान विद्यालय की तमाम छोटी- बड़ी व्यवस्था एवं समस्याओं पर रहता था। यहाँ पढ़ाने वाले शिक्षक भी अपने विद्यार्थियों के प्रति समर्पित रहते थे, समाज द्वारा उन्हें भरपूर सम्मान भी मिलता था। शिक्षकों को समाज में एक अलग गौरव प्राप्त था।

आज सरकारी विद्यालयों में ज्यादातर कमजोर वर्ग एवं गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ने आते हैं। उच्च और मध्यम वर्ग के लोग अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में भेजना सामाजिक स्तर के प्रतिकूल समझने लगे हैं। सरकारी विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का आभाव हो चूका हैl इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि सरकारी विद्यालयों में किसी भी जनप्रतिनिधि या पदाधिकारी- कर्मचारी के बच्चे पढ़ते ही नहीं, दुसरे और साफ शब्दों में कहें तो देश के लगभग तमाम सरकारी विद्यालयों को जानबुझकर दोयम दर्जे का विद्यालय बना दिया गया हैl
छत्तीसगढ़ में बलरामपुर जिला के जिलाधिकारी अवनीश शरण ने इस सच्चाई को समझते हुए प्रथम पुरुषी विचार के तहत अपनी बेटी वेदिका शरण का नामांकन एक सरकारी विद्यालय में कराया हैl बिहार के समस्तीपुर जिले से आने वाले अवनीश शरण, पटना निवासी पूर्व CBI डायरेक्टर रंजीत सिन्हा के दामाद हैं। एक ओर जहाँ अमीरों और अफसरों के बीच बच्चों को महँगी से महँगी शिक्षा देने की होड़ मची हुयी है, वहाँ इस पदाधिकारी की सोच और पहल सराहनीय व अनुकरणीय है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कार्यरत अवनीश शरण बगैर किसी तामझाम के स्वयं बाइक से दूर दराज़ के क्षेत्रों में निकलते हैं, जमीन पर चटाई बिछाकर आमलोगों की परेशानियां सुनते हैं। इन्होंने अपने जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को आदर्श केंद्र बनाने का प्रण भी लिया है। अपने कार्य के जरिये जनता से जुड़े हुए शरण को उनकी कर्तव्यनिष्ठता और ईमानदारी के लिए न सिर्फ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह, वरन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सराहना कर चुके हैं, सम्मानित कर चुके हैं।
समाज में यह एक कहानी लगने जैसी बात हो सकती है पर आवश्यकता है इसे बदलाव की निशानी के रूप में याद रखने की। ये छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव के गवाह बन सकते हैं। pileekhabar.com अवनीश शरण IAS को सलाम करता है, बधाई देता है और उन्हें Icon मानता हैl

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