जिन मदरसों में नहीं गाया गया राष्ट्रगान उनके खिलाफ होगी NSA की कार्रवाई

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स्वतंत्रता दिवस पर जिन मदरसों में राष्ट्रगान नहीं गया और कार्यक्रमों की वीडियोग्राफी नहीं की गई, उन मदरसों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है. योगी सरकार द्वारा जारी फरमान को न मानने वाले मदरसों पर नेशनल सिक्यूरिटी एक्ट (NSA) के तहत कार्रवाई हो सकती है. बताया जा रहा है कि सरकार के इस आदेश का प्रदेश के करीब 150 मदरसों ने पालन नहीं किया है.
बरेली के शहर काजी मौलाना असजद रजा खान ने पहले ही ऐलान कर रखा था कि ‘राष्ट्रगान गैरइस्लामी’ है, क्योंकि इसमें कुछ ऐसे शब्द हैं जो इस्लाम के खिलाफ हैं. उन्हें राष्ट्रगान में अधिनायक शब्द को लेकर आपत्ति थी, साथ ही राष्ट्रगान में शामिल ‘भारत भाग्य विधाता’ को भी गैर इस्लामिक बताया गया. इसके अलावा दरगाह आलाहजरत से मदरसों में राष्ट्रगान न गाए जाने का फरमान भी जारी हुआ था.
इस सरकारी आदेश को कई जगह नकार दिया गया. बरेलवी मरकज से जुड़े मदरसों में तिरंगा तो फेहराया गया लेकिन राष्ट्रगान नहीं गया. इसके बदले इकबाल का लिखा “सारे जहां से अच्छा हिदोस्तां हमारा..” गाया गया. लगभग डेढ़ सौ मदरसों में तिरंगा तो फहराया गया, लेकिन राष्ट्रगान नहीं गाया गया. इसकी जगह “सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां” तराना पढ़ा गया.


प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री ने कहा कि जिन मदरसों में सरकार के इस आदेश का पालन नहीं हुआ उनके खिलाफ कारवाई की जाएगी.उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार राहुल गुप्ता ने 3 अगस्त को राज्य के सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को सर्कुलर जारी करते हुए कहा था कि राज्य के सभी मदरसों में तिरंगा फहराकर राष्ट्रगान गाया जाएगा और इस कार्यक्रम की वीडियोग्राफी भी की जाएगी.
बरेली के डिविजनल कमिश्नर डॉ पीवी जगनमोहन ने भी कहा है कि जिन मदरसों में राष्ट्रगान नहीं गाने के सबूत मिले हैं, उन मदरसों से जुड़े लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस बाबत पुख्ता सबूत मिलने और जांच में राष्ट्रगान नहीं गाए जाने की पुष्टि होती है तथा मदरसा प्रबंधन लिखित में यह स्वीकार करता है तो हम उनके खिलाफ केस दर्ज करेंगे. ऐसे लोगों के खिलाफ हम प्रिवेंशन ऑफ नैशनल ऑनर ऐक्ट और नैशनल सिक्यारिटी ऐक्ट के तहत कार्रवाई कर सकते हैं.
सरकार किसी भी व्यक्ति को NSA के तहत जब तक चाहे, तब तक हिरासत में रख सकती है और हिरासत में रखने का कारण बताना भी सरकार के लिए जरूरी नहीं है.

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