जानिए क्यों दो फीसदी ज्यादा वोट लेकर बीजेपी से 26 सीट कम ला पाई कांग्रेस

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हाल ही में संपन्न हुए कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस के खाते में 78 सीटें आयी जबकि बीजेपी के खाते में 104 सीटें आयीं। कर्नाटक में कांग्रेस की सीटों की संख्या देखकर ऐसा लगता है कि राज्य में सिद्धारमैया सरकार के खिलाफ लोगों ने वोट किया जिसके कारण कांग्रेस की सीट 122 से 78 पर सिमट गई। लेकिन कांग्रेस के खाते में आये मतदान प्रतिशत कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। कांग्रेस को इस चुनाव में 38 फीसदी वोट मिले जबकि पिछले चुनाव में कांग्रेस को 36.6 फीसदी वोट मिले थे।
बीजेपी के मुकाबले 26 सीटें कम जीतने वाली कांग्रेस का वोट शेयर लगभग दो फीसदी अधिक रहा। बीजेपी के लिए फायदे का सौदा ये रहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और श्रीरामुलु की घर वापसी करा दी जिन्होंने बीजेपी खेमे के वोट शेयर को बढ़ाने का काम भी किया।
बीजेपी के लिए पिछले विधानसभा चुनावों के बाद इस आंकड़े तक पहुंचना आसान नहीं था। लेकिन भाजपा ने 2013 में 32 फीसदी के मुकाबले 4 फीसदी वोट शेयर अपने पाले में खिंचा और इस चुनाव में 36 फीसदी वोट प्राप्त कर लिया। इसके बाद इस वोट को बीजेपी ने सीटों में बदलने में सफलता प्राप्त कर ली। JD(S) ने केवल 18.3 फीसदी वोट प्राप्त किया जो कि पिछले चुनाव की तुलना में 2 फीसदी कम रहा। लेकिन इनका कांग्रेस के मुकाबले सीटों पर कन्वर्जन हुआ। ये केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि वोकलिंगा बाहुल इलाकों में ये काफी प्रभावी हुए।
कांग्रेस ने हैदराबाद-कर्नाटक, उत्तरी कर्नाटक और पुराने मैसूर में बीजेपी से अधिक वोट हासिल किया। लेकिन अन्य इलाकों में कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ और वोट शेयर भी काफी कम रहा, यहां कुल 99 सीटें हैं। अन्य इलाकों में बीजेपी का वोट प्रतिशत भी अधिक रहा। ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस ने बीजेपी को पछाड़ा लेकिन शहरी इलाकों में कांग्रेस बीजेपी से पीछे रह गई। 20 सीटों पर कांग्रेस ने 38.7 फीसदी वोट प्राप्त किया जबकि बीजेपी को 32.3 प्रतिशत वोट मिला। लेकिन दोनों के खाते में 7-7 सीटें आयी।
जबकि आरक्षित सीटों पर भी काफी बदलाव देखने को मिला। एससी सीटों पर कांग्रेस ने बीजेपी से अधिक वोट हासिल किया लेकिन बीजेपी की 16 सीटों के मुकाबले 12 सीटों पर ही जीत हासिल कर पायी। यही हाल बीजेपी का रहा जिसने ST सीटों पर कांग्रेस से अधिक वोट हासिल किया लेकिन कांग्रेस के 8 सीटों के मुकाबले केवल 6 सीटों पर जीत मिली।120 लिंगायत बाहुल सीटों पर कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ा और 35.9 फीसदी से 38.1 फीसदी पहुंचा। वहीं इन सीटों पर कांग्रेस के मुकाबले बीजेपी का वोट शेयर 40.6 फीसदी रहा और ये कांग्रेस के वोट शेयर से अधिक प्रभावी साबित हुआ।

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