पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने शनिवार को दावा किया है कि उनका देश अपनी जमीन को भारत सहित किसी भी देश के खिलाफ आतंकवाद के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा. साथ ही उन्होंने कहा कि जैश ए मोहम्मद आतंकी समूह के ”मुख्य केंद्र” को सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया है.
भारत ने बुधवार को पाकिस्तान को एक डोजियर सौंपा था, जिसमें पुलवामा हमले में जैश ए मोहम्मद की संलिप्तता और पाकिस्तान में इस आतंकी समूह के शिविरों की मौजूदगी का विशिष्ट ब्योरा था, जैश ए मोहम्मद संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित एक आतंकी संगठन है.
कुरैशी ने कहा कि भारत ने अपना डोजियर सौंपा, यदि भारत इस पर बात करना चाहता है तो हम इसके लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि देश में नयी सोच और नए रुख वाली नयी सरकार है और इसकी नीतियां बिल्कुल स्पष्ट हैं. कुरैशी ने कहा कि हम किसी भी समूह या संगठन को भारत सहित किसी भी देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल नहीं करने देंगे.
कुरैशी की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पुलवामा में 14 फरवरी को हुए भीषण आतंकी हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे और हमले की जिम्मेदारी जैश ए मोहम्मद ने ली थी. कुरैशी ने कहा कि इस बारे में अब भी भ्रम है कि जैश ने हमले की जिम्मेदारी ली है या नहीं. भ्रम यह है कि जब “जैश नेतृत्व से बात की गई तो उन्होंने हमले में अपना हाथ होने से इनकार किया.” यह पूछे जाने पर कि जैश नेतृत्व से किसने संपर्क किया, कुरैशी ने कहा कि यहां के लोगों ने और हमारे जानकार लोगों ने.
कुरैशी ने पूर्व में स्वीकार किया था कि जैश ए मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर पाकिस्तान में है और बहुत बीमार है, लेकिन कहा कि सरकार उसके खिलाफ तभी कार्रवाई कर सकती है जब भारत ऐसे ठोस सबूत प्रदान करे जो अदालत में टिक सकें. कुरैशी ने कहा था कि मेरी जानकारी के अनुसार वह (मसूद) पाकिस्तान में है. वह इस हद तक बीमार है कि उसका घर से बाहर निकलना भी मुश्किल है. उनकी टिप्पणी तब आई जब कुछ दिन पहले पाकिस्तान के दोस्त चीन सहित 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बयान में जैश ए मोहम्मद का नाम लेते हुए पुलवामा हमले की कड़े शब्दों में निन्दा की और इसे ”जघन्य तथा कायराना हमला करार दिया.
एक साक्षात्कार में कुरैशी ने कहा कि पंजाब सरकार ने जैश ए मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मुख्य केंद्र को कब्जे में ले लिया है. वह बहावलपुर स्थित मदरसातुल साबिर और जामा ए मस्जिद सुभानअल्लाह का नियंत्रण प्रांतीय सरकार द्वारा अपने हाथों में लिए जाने का हवाला दे रहे थे. उन्होंने कहा कि भारत को कार्रवाई योग्य सबूत देने चाहिए जिससे कि मामला दर्ज किया जा सके. पाकिस्तानी अदालत स्वायत्त हैं और मामले को आगे बढ़ाने के लिए सबूत की आवश्यकता है.
कुरैशी ने मौजूदा स्थिति पर कहा कि पाकिस्तान की नयी सरकार की नयी सोच है और संघर्षों का समाधान केवल वार्ता से हो सकता है. उन्होंने कहा कि स्थिति अब भी बहुत नाजुक है, दोनों देशों के सशस्त्र बल अब भी हाई अलर्ट पर हैं. पाकिस्तान स्थिति को शांत करना चाहता है. भारतीय मीडिया का एक तबका गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहा है और युद्धोन्माद फैला रहा है. कुरैशी ने कहा कि हम परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसी देश हैं, क्या हम युद्ध का जोखिम उठा सकते हैं?


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