छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों द्वारा किए गए इस साल के सबसे बड़े हमले में 24 जवान शहीद हो गए हैं। सुकमा में चिंतागुफा के पास नक्सलियों ने घात लगाकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की टीम पर हमला किया। करीब 300 नक्सलियों ने सीआरपीएफ की टीम पर हमला किया था। इस हमले के बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह ने दिल्ली जाने की योजना को टालते हुए रायपुर में आपातकालीन बैठक बुलाई है। वहीं गृह राज्यमंत्री हालात का जायजा लेने के लिए मंगलवार को रायपुर जाएंगे। दंतेवाड़ा के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल पी सुंदरराज ने बताया कि एक रेस्क्यू टीम घटनास्थल के लिए रवाना कर दी गई है और कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है। उन्होंने बताया कि इस एनकाउंटर में पांच नक्सलियों को भी मार गिराया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जब CRPF की टीम खाना खा रही थी जब नक्सलियों ने हमला किया। यह घटना सोमवार सुबह दोपहर डेढ़ बजे की है। बताया जा रहा है कि CRPF की 74वीं बटालियन रोड ओपनिंग के लिए निकली थी। इस दौरान नक्सलियों ने CRPF की टीम पर हमला किया। सीआरपीएफ की अधिकारी ने बताया है कि नक्सलियों के साथ हुए एनकाउंटर में सीआरपीएफ के 24 जवान शहीद हो गए हैं और सात जवान घायल है। वहीं छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में दस किलो विस्फोटक बरामद किया गया है। यह विस्फोटक नक्सलियों द्वारा लगाया गया था। बम निरोधक दस्ते ने इस विस्फोटक को निष्क्रिय कर दिया है। इसके पूर्व इसी वर्ष 1 मार्च को भी सुकमा जिले में नक्सली हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 11 जवान शहीद हुए थे। जवान इस इलाके में अवरुद्ध सड़कों को खाली करने के काम में जुटे थे, तभी उनपर घात लगाकर हमला किया गया। टाहकवाड़ा में 11 मार्च 2014 को CRPF की टीम पर हमला किया गया था, जिसमें 16 जवान शहीद हो गए थे। 6 अप्रैल 2010 को ताड़मेटला में भी CRPF के 76 जवान शहीद हुए थे। 12 जुलाई, 2009 को जिला राजनांदगांव में एम्बुश में पुलिस अधीक्षक वीके चौबे सहित 29 जवान शहीद हुए। इसी प्रकार नारायणपुर के घौडाई क्षेत्र अंतर्गत कोशलनार में 27 सुरक्षाकर्मी एम्बुश में मारे गए थे। तारमेटला में अगस्त 2007 में मुठभेड़ में थानेदार सहित 12 जवान तथा जुलाई 2007 में एर्राबोर अंतर्गत उरपलमेटा एम्बुश में 23 सुरक्षाकर्मी मारे गए। जबकि सितम्बर 2005 में गंगालूर रोड पर एंटी-लैंडमाइन वाहन के ब्लास्ट में 23 जवान शहीद हुए थे।
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