मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा का चुनाव EVM से ही कराए जाने की पूरजोर वकालत करते हुए कहा कि EVM के प्रयोग की वजह से ही आम आदमी वोट दे पाता है. साथ ही उन्होंने कहा कि 2021 में जाति आधारित जनगणना ही होनी चाहिए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि EVM के प्रयोग की वजह से ही आम आदमी वोट दे पाता है, वरना बैलेट पेपर के जमाने में तो बूथ का वोट होता था. मेरा स्पष्ट विचार है कि चुनाव शत- प्रतिशत EVM से ही होने चाहियें. साथ ही प्रत्येक बूथ पर VVPAT का भी इंतजाम होना चाहिए. JDU ने मुख्य चुनाव आयुक्त को भी अपनी इस राय से अवगत करा दिया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में भी गरीब सवर्णों को आरक्षण मिलेगा. साथ ही उन्होंने 2021 में जाति आधारित जनगणना कराने की मांग करते हुए OBC को मिलने वाले आरक्षण का प्रतिशत बढाने की मांग को भी सही बताया. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव की घोषणा के पहले पटना में NDA की रैली हो सकती है और इसमें PM मोदी के भी आने की संभावना है.
नीतीश कुमार ने कहा कि 2021 में जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए. बिहार में मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पूर्व में की गयी जातिगत जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग लगातार करती रही है. CM ने कहा कि 1931 के बाद देश में जातिगत जनगणना नहीं हुई है. इसलिए किस जाति की कितनी संख्या है और क्या सामाजिक हालत हैं, वो जातिगत जनगणना से ही पता चल सकता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी पार्टी ने चुनाव आयोग को मतदाता पर्ची हर घर में पहुंचने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का सुझाव दिया था. हमारी यह भी मांग है कि BLO द्वारा जारी मतदान पर्ची परिवार को सौंपकर उससे रिसिविंग लेने की व्यवस्था भी करें, इससे मतदाता अपनी पर्ची लेकर आसानी से मतदान कर सकेंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिटीजनशीप एमेडमेंट बिल-2016 पर जदयू का रूख पहले से ही स्पष्ट है, हम राज्यसभा में इसका विरोध करेंगे. अब कांग्रेस को साफ करना है कि वह इस बिल पर क्या रूख रखने वाली है? क्योंकि जिस तरह से कांग्रेस ने लोकसभा में वोटिंग के दौरान वॉकआउट किया, उससे स्पष्ट है कि वह इस बिल का समर्थन कर रही है. कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह राज्यसभा में भी इस बिल का लोकसभा की तरह ही समर्थन करेगी. लोकसभा में तो भाजपा को कांग्रेस के वोट की जरूरत नहीं थी, लेकिन राज्यसभा में कांग्रेस की अहमियत है. असम गण परिषद के डेलिगेशन ने कुछ दिनों पहले मुझसे मुलाकात की थी. हमारा मानना है कि असम के लोगों की अपनी पहचान है, उस पर असर नहीं पड़ना चाहिए, उनकी भावनाओं का सम्मान होना चाहिए. इस मामले में हमने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को भी अपनी बातों से अवगत करा दिया है.
बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी RJD पूर्व में की गयी जातिगत जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग उठाती रही है. सोमवार को JDU अध्यक्ष और बिहार के CM ने भी जातिगत जनगणना कराये जाने की मांग छेड़ते हुए कहा कि 2021 में जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए, क्योंकि 1931 के बाद देश में जातिगत जनगणना नहीं हुई है. साथ ही CM ने OBC के अंतर्गत कोटा बढ़ाने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यह मांग सही है, मुझे इस मांग पर कोई ऐतराज नहीं है. आबादी के अनुरूप अगर आरक्षण हो जाये तो इससे अच्छी कोई बात नहीं. ज्ञात है कि 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालूप्रसाद ने जातिगत जनगणना रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग उठायी थी. केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के बाद राजद ने पुनः उसे सार्वजनिक करने की मांग की थी. मुख्यमंत्री के इस बयान को वर्तमान समय में काफी अहम माना जा रहा है.



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