चारा घोटाले से जुड़े दूसरे मामले में भी लालू यादव गये जेल

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बिहार के चारा घोटाला से जुड़े एक मामले में शनिवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव समेत 15 आरोपियों को दोषी करार दिया और 7 को बरी कर दिया। ये सभी 22 आरोपी कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट 3 जनवरी को सजा सुनाएगी। लालू प्रसाद को होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल ले जाया गया। कोर्ट का फैसला आते ही राजद कार्यकर्ता निराश हो गए। कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
देवघर का यह मामला आरसी 68 (ए)-96 के तहत 1996 में दर्ज हुआ था। जिसमें आरोप लगा कि घोटाले में पशुपालन विभाग के अधिकारी व ट्रेजरी ऑफिसर से लेकर सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री तक जुड़े थे। पशु के लिए खरीदे गए चारा का फर्जी बिल बनाकर ट्रेजरी को भेजा जाता था। ट्रेजरी के अफसर इस बात की बगैर जांच किए कि बिल सही है या नहीं या सच में चारा की खरीद हुई है या नहीं पैसे जारी कर देते थे। ट्रेजरी से निकलने वाले पैसे में सभी का हिस्सा पहले से तय होता था।
विपक्ष की मांग पर इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराई गई। जांच में खुलासा हुआ कि घोटालेबाजों ने चारा के अलावा पशुओं को ढोने से लेकर दवा खरीद तक हर काम के फर्जी बिल बनाए और उससे पैसे निकाल लिए। अफसरों ने कागजों में 100-120 क्विंटल चारा और 10-12 बैल को स्कूटर पर लादकर एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाना दिखाया। सीबीआई के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री (लालू यादव) को न सिर्फ इस मामले की जानकारी थी, बल्कि उन्होंने कई मौकों पर वित्त मंत्रालय के प्रभारी के रूप में इन पैसों को निकालने की अनुमति दी थी। लालू के खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और वे कई महीनों तक जेल में रहे।


चारा घोटाले में यह 33वां और लालू प्रसाद से जुड़ा दूसरा फैसला है। लालू पर चारा घोटाले के कुल सात केस दर्ज हैं। इसके पूर्व चाईबासा ट्रैजरी से गलत तरीके से पैसा निकालने के मामले में 31 मई 2007 को सीबीआई के स्पेशल जज यूएसपी सिन्हा ने आरसी 66 (ए)-96 के तहत उन्हें 6 साल की सजा सुनायी थी। लालू के खिलाफ 5 अन्य केस में सुनवाई जारी है। 1997 में वह पहली बार जेल गए थे। तब उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी और फिलहाल वो जमानत पर हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप था कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की जाँच के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 96 तक अटकाए रखा। फिर 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया, तब तक चारा घोटाले का मामला सामने आ चुका था।
इस मामले में कुल 34 लोगों को आरोपी बनाया गया था, इनमें 11 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि एक आरोपी गुनाह कबूल कर सरकारी गवाह बन गया था। मामले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र के अलावा पूर्व मंत्री विद्यासागर निषाद, जगदीश शर्मा, आरके राणा, ध्रुव भगत, फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद, बेक जूलियस, एसी चौधरी, डॉ. कृष्ण कुमार प्रसाद, सुधीर भट्टाचार्य, त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, संजय अग्रवाल, ज्योति झा, गोपीनाथ दास, सुनील गांधी, सरस्वती चंद्र, साधना सिंह, राजाराम जोशी और सुशील कुमार आरोपियों में शामिल हैं।

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