चाइनीज मांझे में फंसकर कानपुर के भाजपा नेता संतोष निगम की गर्दन कट गई और वह बाइक से गिरकर बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें बेनाझाबर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी गर्दन में 10 टांके लगे हैं। बेनाझाबर कालोनी निवासी भाजपा नेता संतोष निगम दोपहर में नवीन मार्केट स्थित पार्टी दफ्तर में आयोजित बैठक में भाग लेने गए थे। शाम को वह बाइक से लौट रहे थे, चुन्नीगंज में बीएनएसडी इंटर कालेज के पास एक युवक पतंग उड़ा रहा था, इसी दौरान उनकी गर्दन चाइनीज मांझे की चपेट में आ गई। गर्दन कट गई और बाइक अनियंत्रित हो सड़क पर गिर गयी। उनकी हालत देख राहगीर दौड़े और उन्हें सड़क के किनारे किया। कंट्रोल रूम में हादसे की सूचना मिलने पर कर्नलगंज पुलिस मौके पर पहुंची और संतोष को इलाज के लिए अस्पताल ले गई। थोड़ी देर बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने उनकी हालत खतरे के बाहर बतायी है। हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी लगभग सभी शहरों में चाइनीज मांझा बिक रहा है। मांझा बनाने के एक्सपर्ट आतिफ ने बताया कि नायलोन के धागे को एक केमिकल में डुबाया जाता है। इसके बाद मांझे को ज्यादा धारदार बनाने के लिए पिसी कांच से उसकी कोडिंग की जाती है। धागा नायलोन का होने के कारण वह टूटता नहीं है और काफी धारदार होने की वजह से यह शरीर को जख्मी भी कर देता है। करीब आठ महीने पहले कोयला नगर रोड में साइकिल सवार सुमित शर्मा का मांझे से गर्दन कट गई थी। डेढ़ साल पहले चुन्नीगंज में बाइक सवार बाबूपुरवा निवासी मो. आसिफ का मांझे से गाल कट गया था। उसके पूर्व फूलबाग एलआईसी रोड पर चाइनीज मांझे से पिता के साथ बाइक पर जा रही एक बच्ची की गर्दन कट गई थी और इस हादसे में बच्ची की मौत हो गई थी। कानपुर शहर की ज्यादातर पतंग दुकान पर चाइनीज मांझा बिकती है। प्रशासन जब अभियान चलाता है तो दुकान के बजाय घर से चाइनीज मांझा बेचा जाने लगता है। मुख्य रूप से मेस्टन रोड में रोटी वाली गली, चमनगंज, बेकनगंज, मसवानपुर, रावतपुर, मछरिया, कर्नलगंज आदि इलाकों में खुलेआम मांझा बिकता है। सद्दी का मांझा 800 रुपये प्रति रील मिलता है। जबकि चाइनीज मांझा मात्र 200 रुपये रील मिल जाता है।
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