घुटने का रिप्लेसमेंट अब 70% सस्ता, 6 महीने पहले हार्ट पेशेंट्स को मिली थी राहत

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घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट सर्जरी) के लिए इस्तेमाल होने वाले डिवाइस का मैक्सिमम रेट केंद्र सरकार ने तय कर दिया है। जो नी रिप्लेसमेंट कराने वाले मरीजों के लिए एक अच्छी खबर है। 6 माह पूर्व सरकार ने हार्ट पेशेंट्स को इस्तेमाल होने वाले स्टेंट्स की कीमत 85% तक घटायी थी।
सर्जरी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले क्रोमियम कोबाल्ट नी इम्प्लांट की कीमत 54720 रुपए तय की गई है, जिसके लिए पहले 1.5 लाख रुपए देना होता था। कुल पन्द्रह तरीके के नी इम्प्लांट की कीमतों को रिवाइज करते हुए नई कीमतों को फौरन लागू करने का आदेश दिया गया है। फार्मा रेग्युलेटर NPPA की वेबसाइट पर यह जानकारी आ गयी है। सरकार के अनुसार करीब डेढ़ लाख मरीज हर साल नी इम्प्लांट कराते हैं, यानी कम कीमतों की वजह से हर साल करीब 1500 करोड़ रुपए का फायदा मरीजों को होगा।
केंद्र सरकार ने 6 माह पूर्व फरवरी में हार्ट पेशेंट्स के लिए इस्तेमाल होने वाले स्टेंट्स की कीमत 85% तक घटा दी थी। हार्ट पेशेंट्स के इलाज में इस्तेमाल होने वाले बेयर मेटल स्टेंट की कीमत 7260 रुपए और ड्रग इल्यूटिंग स्टेंट की कीमत 29,600 रुपए तय की गई थीं। पहले इनकी कीमतें 40 हजार रुपए से लेकर 1.98 लाख रुपए तक थीं।


केमिकल एंड फर्टिलाइजर मिनिस्टर अनंत कुमार ने कहा कि “नी इम्प्लांट” पर की गई कैपिंग का फैसला फौरन लागू किया जाएगा। सरकार को ऐसी शिकायतें मिली थीं कि नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के लिए हॉस्पिटल, इंपोर्टर्स और डिस्ट्रीब्यूटर मिलकर 449% तक मुनाफा कमा रहे हैं। सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले इम्प्लांट के इंपोर्टर्स को करीब 76% फायदा होता था। डिस्ट्रीब्यूटर को 100% से ज्यादा तक फायदा होता था। हैरानी की बात ये है कि इन सभी का बोझ सीधे मरीजों पर जाता था।
NPPA के मुताबिक 15 तरह के नी इम्प्लांट की कीमतें तय की गई हैं। इनमें 12 प्राइमरी नी रिप्लेसमेंट सिस्टम जबकि 3 रि-विजन नी रिप्लेसमेंट सिस्टम शामिल हैं। NPPA का कहना है कि कोई भी मैन्युफैक्चरर सीलिंग प्राइस से ज्यादा कीमत पर नी इम्प्लांट नहीं बेच सकता, अगर उसे ऐसा करते हुए पाया गया तो ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्उर 2013 के तहत उसे ओवरचार्ज किया गया अमाउंट ब्याज के साथ सरकार के पास जमा कराना होगा।
NPPA के मुताबिक नी इम्प्लांट के लिए जो कीमतें तय हुई हैं, उनमें डिस्ट्रीब्यूटर्स/ स्टॉकिस्ट और हॉस्पिटल्स/ नर्सिंग होम्स/ क्लीनिक्स का ट्रेड मार्जिन भी जुड़ा हुआ है। अलल-अलग तरह के इम्प्लांट के लिए इनके मैक्सिमम ट्रेड मार्जिन 4 से 16% के बीच रखे गए हैं। वहीं जहां पर मैन्युफैक्चरर्स के जरिए बिना किसी डिस्ट्रीब्यूटर के सीधे हॉस्पिटल्स तक इम्प्लांट पहुंचाए जाते हैं, वहां हॉस्पिटल्स के लिए 16% ट्रेड मार्जिन होगा।
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री के फोरम को-ऑर्डिनेटर राजीव नाथ ने कहा कि इससे आम आदमी को फायदा होगा और उन्हें घुटने की सर्जरी के लिए पहले से काफी कम कीमत चुकानी होगी। डोमेस्टिक इंडस्ट्री को भी इससे फायदा है जो पहले से ही अच्छी क्वालिटी के इम्प्लांट वाजिब कीमतों पर उपलबध कराती आ रही है। उनका कहना है कि पहले सरकार ने स्टेंट की कीमतें 85% तक घटाई थीं, जिसका फायदा मरीजों के साथ ही डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर्स को हुआ है।

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