गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा को बर्दाश्त ना होनेवाली घटना बताते हुए PM ने कहा कि किसी भी शख्स को कानून अपने हाथों में लेने का हक़ नहीं है। भावुक मोदी ने कहा कि गाय की रक्षा, गौ की भक्ति महात्मा गांधी, विनोबा जी से बढ़कर कोई नहीं कर सकता है। देश को उसी रास्ते पर चलना होगा।
साबरमती आश्रम की सौवीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शरीक होने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने महात्मा गांधी के आध्यात्मिक गुरु माने जाने वाले श्रीमद राजचन्द्र जी पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी कियाl साबरमती आश्रम की स्थापना महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से आने के बाद साल 1917 में अहमदाबार के कोचरब में की गई थी। आश्रम अहमदाबाद के निकट साबरमती नदी किनारे स्थित है। गांधीजी ने स्वतंत्रता आंदोलन और समाज के उत्थान की सभी प्रमुख गतिविधियों का संचालन इसी आश्रम से किया था, जिसे विख्यात रूप से साबरमती आश्रम के रूप में जाना जाता था।
12 मार्च 1930 को नमक कानून को तोड़ने के लिए दांडी यात्रा के लिए रवाना होने से पहले वह इस आश्रम में लगातार रहे। गांधी जी ने दांडी से यात्रा शुरू करने से पहले घोषणा की थी कि वे इस आश्रम में देश की स्वतंत्रता से पहले नहीं लोटेंगे। इतिहासकारों का मानना है कि पौराणिक काल में दधीचि ऋषि का आश्रम भी यहीं पर था।

प्रधानमंत्री ने राजकोट में रोड शो करने के बाद जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि 40 साल बाद कोई PM राजकोट सरकारी कार्यक्रम में आया हैl मेरे दिल में राजकोट की खास जगह है, मेरे राजनीति की शुरुआत यहीं से हुई हैl
उन्होंने कहा कि दिव्यांगों की जिम्मेदारी सिर्फ उनके परिवार की ही नहीं बल्कि पूरे समाज की हैl आजादी के 70 साल के बाद भी साइन लैंग्वेज हिंदुस्तान के हर राज्य में अलग-अलग था, दिव्यांग जनों के इस भाषा में भेद थाl इसलिए पूरे देश में दिव्यांग कहीं जाते थे तो उसे समझने या समझाने के लिए कोई इंटरप्रेटर नहीं थाl हमने एक कानून बनाया और देश में सभी जगह एक साइन लैंग्वेज सिखाया जाए, इसकी व्यवस्था कीl यह काम बहुत छोटा लगता है, लेकिन दिव्यांग जनों की दृष्टी से बहुत महत्वपूर्ण हैl
उन्होंने कहा कि 1992 में सामाजिक अधिकारिता विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को मदद देने का काम शुरू हुआ, लेकिन मेरी सरकार बनने से पहले तक केवल 55 ऐसे कार्यक्रम हुए जहां दिव्यांगजनों को संसाधन मुहैया कराए गए, जबकि जब से उनकी सरकार आई है तो केवल तीन साल के भीतर 5500 कार्यक्रम करके दिव्यांगजनों का तकनीक और संसाधन मुहैया कराए गए हैंl जबकि आज राजकोट में 18500 दिव्यांगजनों को संसाधन वितरित करके राज्य सरकार ने एक नया रिकॉर्ड बनायाl

प्रधानमंत्री बनने से पहले तक नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और लोकसभा में भारी जीत के बाद 2014 में देश की कमान संभाली। जिसके बाद कड़ी मेहनत से देश सेवा करते हुए भी लगातार गुजरात को तवज्जो देते हुए वहां का दौरा करते रहे हैं। उसकी वजह है वहां के लोगों को अहमियत देना, ताकि गुजरात के लोगों में ऐसा संदेश ना जाएं कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने गुजरात को पहले के मुकाबले अब तवज्जो देना कम कर दिया है।
इस साल के आखिर में गुजरात का विधानसभा चुनाव होना है। भाजपा वहां पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है और प्रधानमंत्री के दौरे से पार्टी को यहाँ एक नई ऊर्जा देने की कोशिश की जा रही है। मोदी के गुजरात छोड़ने के बाद भाजपा के लिए पिछले दिनों जिस तरह की कठिन परिस्थिति बनी, चाहे वह आनंदी बेन पटेल को मुख्यमंत्री के पद से हटाना हो या फिर हार्दिक पटेल का मामला हो, पार्टी किसी तरह का रिस्क लेने के मूड में नहीं है।
भारतीय जनता पार्टी ने मोदी की अगुवाई में लड़े पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में 128 सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी। लेकिन, इस बार भाजपा ने छह महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में 182 में से 150 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। अमित शाह अपने हर कार्यक्रम में गुजरात दौरे में यही बात कहते है कि मोदी जब मुख्यमंत्री थे तो 128 सीट दिलाई थीं। अब जब वे देश के प्रधानमंत्री बन गए हैं तो उनको 150 सीट का तोहफा देकर उनका मान बढ़ाना चाहिए।

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