गोल्डकोस्ट कॉमनवैल्थ में भारत ने बनाए कई रिकॉर्ड

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ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 26 गोल्ड के साथ कुल 66 मैडल जित इतिहास रच दिया. इस कॉमनवैल्थ गेम्स में भारत ने कई परंपराएं तोड़ीं, देश को नए खेलों में भी चैंपियन मिले. पहलवानी, बॉक्सिंग और बैडमिंटन में भारतीय खिलाडिय़ों ने उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन किया तो भारतीय टेबल टेनिस टीम ने काफी हैरान भी किया, विशेष कर नई दिल्ली की मनिका बत्रा ने टेबल टैनिस वर्ग से अकेले ही चार मैडल जीता. मैडल टैली में ऑस्ट्रेलिया और इंगलैंड के बाद भारत तीसरे नंबर पर (26 गोल्ड, 20 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज) रहा.
कॉमनवैल्थ गेम्स की शुरुआत 1930 में हुई थी. हर चार साल बाद होने वाली यह गेम्स 1942 और 1946 में वल्र्ड वार के चलते नहीं हुयी थी. 1930 में इसे ब्रिटिश इम्पायर गेम्स के नाम से जाना जाता था, 1954 में इसे बदलकर ब्रिटिश इम्पायर एंड कॉमनवैल्थ गेम्स रख दिया गया, 1970 में इसे ब्रिटिश कॉमनवैल्थ गेम्स कहा गया, लेकिन उसके बाद इसे सिर्फ कॉमनवैल्थ गेम्स कहा जाने लगा है और जिस जगह पर यह गेम होती हैं, उस शहर का नाम कॉमनवैल्थ गेम्स के आगे लग जाता है.


भारत ने आाजादी से पहले दो बार कॉमनवैल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था लेकिन इनमें सिर्फ दो ही पदक हासिल हुए थे. आजादी के बाद 1954 में भारत ने इन गेम्स में हिस्सा लिया लेकिन भारतीय खिलाड़ी मैडल नहीं जीत पाये. 1958 में भारतीय खिलाडिय़ों ने 2 गोल्ड समेत तीन मैडल जीते. 1990 की कॉमनवैल्थ गेम्स में पहली बार भारत ने दहाई का आंकड़ा पार किया था और तब 13 गोल्ड सहित 32 पदक हासिल किए थे.
कॉमनवैल्थ गेम्स में भारतीय का स्वर्णिम साल था 2010, जब दिल्ली में हुए इस गेम्स में भारतीय खिलाडिय़ों ने 38 गोल्ड, 27 सिल्वर, 36 ब्रॉन्ज सहित कुल 101 मैडल प्राप्त किए थे. इसके पूर्व 2002 में मेनचेस्टर में 30 गोल्ड, 22 सिल्वर, 17 ब्रॉन्ज कुल 69 मैडल और 2014 ग्लास्गो में 15 गोल्ड, 30 सिल्वर, 19 ब्रॉन्ज कुल 64 मैडल का रिकॉर्ड भारतीयों के नाम था.
आखिरी दिन महिला बैडमिंटन सिंगल्स में भारत की सायना नेहवाल और पीवी सिंधु आमने-सामने थीं और साइना ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता दिखाते हुए गोल्ड पर कब्जा जमाया. रियो ओलंपिक में सिल्वर मैडल विजेता पीवी सिंधु ने फाइनल में साइना को कड़ी टक्कर दी लेकिन वह साइना के अनुभव को मात नहीं दे सकीं और 56 मिनट तक चले इस फाइनल में वो 18- 21, 21- 23 से हार गयीं. इस जीत के साथ ही कॉमनवैल्थ गेम्स में दो गोल्ड जीतने वाली साइना पहली बैडमिंटन प्लेयर बन गई. हाँलाकि दुनिया नंबर वन शटलर किदांबी श्रीकांत इसके पुरुष सिंगल में एक बड़े उलटफेर का शिकार हो गए और मलेशिया के दिग्गज ली चोंग वेई से एक घंटे पांच मिनट चले मैच में 21- 19, 14- 21, 14- 21 से मात खाकर गोल्ड पर कब्जा करने से चूक गये. उसी प्रकार पुरुष डबल्स वर्ग में भी भारतीय जोड़ी सात्विक रैड्डी और चिराग शेट्टी फाइनल में इंग्लैंड की मार्कस एलिस और क्रिस लेंगरिज की जोड़ी को टक्कर नहीं दे पाए और सीधे सेटों में मात्र 38 मिनट में 13-21, 16-21 से हार गए.

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