गुजरात में कांग्रेस ने चला हिंदुत्व कार्ड, दस पाटीदार नेता को भी लड़ायेगी

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दो दशक से गुजरात की सत्ता से बाहर कांग्रेस इस बार कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती है. लिहाजा हार्दिक पटेल को अपने पाले में करने के लिए कांग्रेस मीटिंग दर मीटिंग कर रही है. माना जा रहा है कि पाटीदार आरक्षण समिति के दस नेता को उत्तर सौराष्ट्र से चुनाव लड़ाने पर विचार अंतिम चरण में है. उधर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात में मंदिरों में दर्शन कर हिन्दू कार्ड भी खेल रहे हैं.
भाजपा ने राहुल गांधी के मंदिरों में दर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि राहुल गांधी चुनाव के पहले हिंदू मंदिरों में जा रहे हैं ताकि वोट हासिल किए जा सकें. उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि राहुल गांधी क्यों चुनावों के पहले मंदिरों की यात्रा कर रहे हैं. लोग उनके इरादे जानते हैं कि वे ऐसे हथकंडों से वोट हासिल करना चाहते हैं. उनका भक्ति के प्रति कोई झुकाव नहीं है क्योंकि अपने पहले की यात्राओं के दौरान राहुल गांधी कभी किसी मंदिर में नहीं गए. पटेल ने कहा कि हम चाहते हैं कि कांग्रेस मुख्यधारा हिन्दुत्व का सम्मान करे, लेकिन वोट हासिल करने के लिए उनके हथकंडे गुजरात में सफल नहीं होंगे.
उधर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि लोग भाजपा को सबक सिखाएंगे क्योंकि वह मंदिर जाने का विरोध कर रही है. कांग्रेस नेता शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि क्या किसी के पास भक्ति का पेटेंट है? वे लोग मंदिर की यात्रा का विरोध कर रहे हैं? गुजरात के लोग उन्हें सबक सिखाएंगे. राहुल गांधी जी हिंदू मंदिरों के अलावा जैन मंदिर और गुरूद्वारे भी गए हैं. हम धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करते हैं.

गुजरात में पटेलों की आबादी करीब 15% है. राज्य की करीब 80 सीटों पर पटेल समुदाय का प्रभाव है. पटेल भाजपा के मुख्य वोट बैंक माने जाते रहे हैं. भाजपा के 182 में से 44 विधायक पटेल जाति से ही आते हैं, लेकिन वर्तमान समय में पाटीदार भाजपा से नाराज हैं. इसका फायदा उठाकर गुजरात की सत्ता से करीब दो दशक से बाहर कांग्रेस पाटीदारों को अपने पक्ष में कर चुनाव में बड़ा फायदा लेना चाहती है.
असल में गुजरात में कड़वा, लेउवा और आंजना तीन तरह के पटेल हैं. आंजना पटेल OBC में आते हैं. जबकि कड़वा और लेउवा पटेल OBC आरक्षण की मांग कर रहे हैं. आरक्षण ना देने से पटेल भाजपा से नाराज हैं. पाटीदार नेता हार्दिक पटेल अपने को राजनीति से दूर रखने की बात कर रहे हों, लेकिन माना जा रहा है कि हार्दिक के दस साथी को उत्तर सौराष्ट्र से कांग्रेस टिकट देने जा रही है.
कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरने वाले पाटीदार आरक्षण समिति के लोगों में एक प्रमुख नाम है दिलीप साबवा. शिक्षक की नौकरी छोड़ हार्दिक के साथ आरक्षण की लड़ाई में कूदे दिलीप बोटाद से चुनाव लड़ने वाले हैं. दूसरा नाम है राजकोट जिला भाजपा के उपाध्यक्ष रह चुके ललित वसोया का जो सौराष्ट्र में समिति के संयोजक हैं.
हार्दिक की सबसे भरोसेमंद साथी और अनामत आंदोलन की अकेली महिला संयोजक गीता पटेल अहमदाबाद के बटवा से चुनाव लड़ने वाली हैं. सूरत में अमित शाह की सभा में हंगामे के बाद गिरफ्तार होकर सुर्खियों में आए मनोज पनारा भी मोरबी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं.

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