अशोक गहलोत ने तीसरी बार राजस्थान के 22वें मुख्यमंत्री, कमलनाथ ने मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री और भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. शपथ ग्रहण में राष्ट्रीय स्तर पर संभावित महागठबंधन के कुल 12 दलों के नेता एक साथ नजर आए.
अशोक गहलोत को राज्यपाल कल्याण सिंह ने राजस्थान के 22वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई, गहलोत तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने. उनके साथ सचिन पायलट ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. गहलोत 1998 में पहली बार 47 वर्ष की उम्र में मुख्यमंत्री बने थे. शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शामिल हुयीं.
समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा (जेडीएस), संसद में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमार स्वामी, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (तेदेपा), पुड्डुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी, राकांपा के शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला (नेशनल कॉन्फ्रेंस), बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा), झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी (झारखंड विकास मोर्चा) एवं हेमंत सोरेन (झारखंड मुक्ति मोर्चा), द्रमुक के स्टालिन, कनिमोझी और टीआर बालू, ज्योतिरादित्य सिंधिया, लोजद के शरद यादव, और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (राजद), नवजोत सिंह सिद्धू, कुमारी शैलजा, जतिन प्रसाद, असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता बदरुद्दीन अजमल एवं सपा के विधायक राजेश कुमार ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराकर संभावित महागठबंधन की झलक और ताकत पुनः दिखायी.
कमलनाथ को मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दोपहर 2:30 बजे शपथ दिलाई. ग्रहण समारोह में प्रदेश के चार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, दिग्विजय सिंह, बाबूलाल गौर और कैलाश जोशी सहित 12 दलों के नेता मौजूद थे. समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राजस्थान के नए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट, कांग्रेस के लोकसभा में नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री नारायणसामी, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा, राजीव शुक्ला, आनंद शर्मा, राज बब्बर, सांसद दीपेंदर हुड्डा, पंजाब में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू आदि भी उपस्थित थे.
जेडीएस नेता पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमार स्वामी, राकांपा के शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, द्रमुक के स्टालिन, कनिमोझी और टीआर बालू, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (तेदेपा), जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला (नेशनल कॉन्फ्रेंस), झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी (झारखंड विकास मोर्चा) एवं हेमंत सोरेन (झारखंड मुक्ति मोर्चा), लोजद के शरद यादव, दिनेश त्रिवेदी (तृणमूल कांग्रेस) और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (राजद) भी मौजूद थे.


कमलनाथ ने शपथ ग्रहण के कुछ ही देर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमने किसानों का कर्ज माफ कर दिया, कन्या विवाह योजना की सहयोग राशि को 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार रुपए कर दिया तथा हम चार गारमेंट पार्क बनाएंगे. बहुत सारी योजनाएं ऐसी हैं, जिनके डिलिवरी सिस्टम खराब हैं, लोगों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है. मुझे बेचैनी और चिंता है कि हम किस तरह से मध्यप्रदेश के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार दे पायें. कमलनाथ के पहले फैसले के तहत उन किसानों को कर्जमाफी का लाभ मिलेगा, जिन्होंने राज्य के सहकारी या राष्ट्रीयकृत बैंकों से शॉर्ट टर्म लोन लिया है. ऐसे 21 लाख किसानों का 31 मार्च 2018 की स्थिति के अनुसार 2 लाख रुपए तक का कर्ज माफ होगा. इससे राज्य सरकार के खजाने पर 15 हजार करोड़ रुपए का भार आ सकता है. हाँलाकि 30 सितंबर 2018 तक राज्य के 40 लाख किसानों पर 57 हजार करोड़ रुपए कृषि ऋण बकाया है.
भूपेश बघेल को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई, साथ ही टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू ने भी मंत्री पद की शपथ ली. शपथ से कुछ घंटे पहले ही बारिश के चलते साइंस कॉलेज मैदान में होने वाले समारोह स्थल को बदलना पड़ा जो बलवीर सिंह जुनेजा इनडोर स्टेडियम में हुआ.
23 अगस्त 1961 को जन्मे भूपेश बघेल 80 के दशक में यूथ कांग्रेस से राजनीति में आए थे. 2000 में छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनते समय वे पाटन के विधायक थे. 23 अगस्त 1961 को जन्मे बघेल जोगी सरकार में मंत्री बने. 2003 में कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने पर बघेल विपक्ष के उपनेता बने. प्रदेश में कांग्रेस को एक बार फिर से खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई. भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को मजबूती देने में अपना गहरा योगदान दिया. पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेवारी सौंपी उस पर खरे उतरे. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में 2014 से लगातार कांग्रेस को मजबूत करने में लगे रहे. भाजपा सरकार के खिलाफ लगातार आक्रामक रहे. किसी भाजपा नेता के साथ कभी भी मंच साझा नहीं किया. विधानसभा में विपक्ष की मजबूत तस्वीर पेश की, यहाँ तक कि कभी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से हाथ भी नहीं मिलाया. संगठनात्मक मामले में बोल्ड स्टैंड लिया, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी तक को पार्टी से निकल बाहर कर दिया.



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