गंगा में कचरा फेंकने पर 50 हजार जुर्माना, सौ मीटर का दायरा ‘No-Development Zone’: NGT

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गंगा को निर्मल बनाने और उसके सफाई अभियान के संकल्प को गति देते हुए नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (NGT) ने गंगा नदी में कचरा फेंकने पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया है।
NGT ने हरिद्वार और उन्नाव के बीच गंगा नदी के तट से 100 मीटर के दायरे को गैर निर्माण जोन भी घोषित किया है साथ ही नदी तट से 500 मीटर के दायरे में कचरा डंप करने पर रोक लगाने सहित अनेक निर्देश जारी किए हैं।
NGT के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि गंगा नदी में किसी प्रकार का कचरा डालने वाले को 50 हजार रूपए पर्यावरण हर्जाना देना होगा। NGT ने कचरा निस्तारण संयंत्र के निर्माण और दो वर्ष के भीतर नालियों की सफाई सहित सभी संबंधित विभागों से विभिन्न परियोजनाओं को पूरा करने के निर्देश भी दिए।
NGT ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी जिम्मेदारी को समझाते हुए चमड़े के कारखानों को चमडा पार्कों अथवा किसी भी अन्य स्थान जिसे राज्य सरकार उचित समझाता हो, वहां छह सप्ताह के भीतर स्थानांतरित करना चाहिए। NGT ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को गंगा और उसकी सहायक नदियों के घाटों पर धार्मिक क्रियाकलापों के लिए दिशानिर्देश बनाने के लिए भी कहा है।


NGT ने 543 पन्नों वाले अपने फैसले के पालन की निगरानी करने और इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने के लिए पर्यवेक्षक समिति का गठन किया है। उसने समिति को नियमित अंतराल में रिपोर्ट पेश करने के भी निर्देश दिए हैं। NGT ने कहा कि शून्य तरल रिसाव और सहायक नदी की ऑनलाइन निगरानी की शर्त औद्योगिक इकाइयों पर लागू नहीं होनी चाहिए।
NGT ने गंगा नदी की सफाई के कार्य को गोमुख से हरिद्वार (पहला चरण), हरिद्वार से उन्नाव (पहले चरण का खंड बी), उन्नाव से उत्तर प्रदेश की सीमा, उत्तर प्रदेश सीमा से झारखंड की सीमा और फिर झारखंड सीमा से बंगाल की खाड़ी तक कई खंडों में बांटा है।
आस्था से जुड़ी होने के बावजूद आज देश में पवित्र गंगा नदी किन हालातों से गुज़र रही है, वो किसी से छिपा नहीं हैl विकास के नाम पर पवित्र गंगा प्रदूषण का शिकार हो रही हैl ‘नमामि गंगे’ जैसे बोर्ड को स्थापना के बाद भी गंगा अपने अस्तित्व की लड़ाई ही दिख रही हैl ऐसे में NGT की यह पहल उसकी नजर में इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता हैl
NGT ने हरिद्वार से लेकर उन्नाव तक गंगा के आस-पास के 100 मीटर के दायरे को ‘No-Development Zone’ घोषित किया हैl माना जा सकता है कि इस फ़ैसले के बाद इस इलाके में गंगा किनारे किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकेगाl हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए Pileekhabar के Facebook पेज को लाइक करें

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