पुलवामा में हुए आतंकी हमले के लिए पुरे देश में पाकिस्तान के विरुद्द आक्रोश है, इसी बीच 30 मई से शुरू हो रहे क्रिकेट विश्व कप से पाकिस्तानी टीम को बाहर करने के लिए ICC पर दबाव बनाने की भी मांग उठने लगी है.
पाकिस्तानी नापाक हरकतों के कारण ही भारत पिछले लम्बे समय से उसके साथ द्वीपक्षिय सीरीज नहीं खेल रहा है. लेकिन इसबार मामला बिल्कुल दूसरा है, लोग पाकिस्तान को ही वर्ल्ड कप से बाहर करवाने की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि ICC को भारतीय स्पांसरों से ही पैसा मिलता है. अगर BCCI पाकिस्तान को बाहर करने के मामले में सख्त रवैया अपनाता है तो कोई कारण नहीं कि ICC इस मांग को नहीं माने.
भारतीय पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कहा कि पिछले हफ्ते जो पुलवामा में हुआ वह बहुत दुखद है, द्वीपक्षीय सीरीज का तो इसके बाद कोई चांस ही नहीं है. भारत को पाकिस्तान के साथ विश्व कप में भी कोई मैच नहीं खेलना चाहिए. मैं समझता हूँ कि भारत ICC को बताये कि हम उनके साथ नहीं खेलेंगे. मैं समझता हूँ कि सिर्फ क्रिकेट ना खेलने से भी कुछ नहीं होगा, भारत सरकार और BCCI को इसका कड़ा जवाब देना जरूरी है. मैं चाहता हूँ कि सरकार तक यह बात जानी ही नहीं चाहिए, BCCI को खुद कड़ा फैसला लेना चाहिए.
गांगुली ने कहा कि बिना हिंदुस्तान के ICC वर्ल्ड कप करवा ही नहीं सकता, उन पर वित्तीय संकट आ जाएगा और भारत के इस फैसले से बहुत बड़ा मुद्दा बन जाएगा. 27 फरवरी को दुबई में ICC की बैठक होनी है, इसमें इस मुद्दे को जरूर उठान चाहिए. हम यह कह सकते हैं पाकिस्तान के रहते हम इस टूर्नामेंट में नहीं खेलेंगे. टेरारिज्म एक ऐसा जहर है जो पूरी दुनिया को खत्म कर देगा.
भारत के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने भी कहा है कि भारत को पाकिस्तान के खिलाफ सिर्फ विश्व कप के मुकाबले नहीं, बल्कि कहीं भी नहीं खेलना चाहिए. अगर हम पाकिस्तान के खिलाफ द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज नहीं खेल रहे हैं तो हमें उनके खिलाफ कहीं भी नहीं खेलना चाहिए. विश्व कप देश से बड़ा नहीं है.

भारत के पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी कहा था कि भारत को 16 जून को मैनचेस्टर में पाकिस्तान के खिलाफ नहीं खेलना चाहिये. यह कठिन समय है, हमला हुआ है, यह अविश्वसनीय है और बहुत गलत है. सरकार कार्रवाई करेगी, पर जहां तक क्रिकेट का सवाल है तो मुझे नहीं लगता कि हमें उनके साथ कोई भी संबंध रखना चाहिये वरना ऐसा ही चलता रहेगा. हमें देश के साथ खड़े होना चाहिये.
पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि अभी देश ने बड़ा हमला झेला है. हर भारतीय सदमे और वक्त गुस्से में है. हमने अपने सुरक्षाकर्मियों की जान गंवाए हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि हम अपने देश में सुरक्षित रहें. यह वक्त सेना के साथ खड़े होने का है. मैं इस वक्त क्रिकेट के बारे में सोचना भी नहीं चाहता, वह भी पाक के साथ.
भारत को वर्ल्ड कप में पाकिस्तान से तो मैच खेलना ही नहीं चाहिए, इस मुद्दे पर तो देश में लगभग एक राय है. हाँ, कुछ लोग सवाल उठा रहे है कि क्या ये संभव है? तो वर्ल्ड कप में आज से पहले भी चार बार ऐसा हो चुका है, जब किसी टीम ने किसी दूसरे देश की टीम के साथ मैच खेलने से इनकार किया था. 1996 वर्ल्ड कप की मेजबानी संयुक्त रूप से भारत, श्रीलंका और पाकिस्तान कर रहे थे. वर्ल्ड कप से एक महीने पहले श्रीलंका में गृहयुद्ध चल रहा था, LTTE द्वारा वहाँ लगातार बमबारी की जा रही थी. इस कारण ऑस्ट्रेलिया ने श्रीलंका से मैच खेलने से इनकार कर दिया था और श्रीलंका को वॉकओवर से 2 पॉइंट मिल गए थे. इसी वर्ल्ड कप में वेस्टइंडीज की टीम ने भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मेजबान श्रीलंका से मैच खेलने से इनकार किया और श्रीलंकाई टीम को वॉकओवर के 2 पॉइंट मिल गए.
वर्ल्ड कप 2003 के दौरान जिम्बाब्वे में राजनीतिक संकट था. तब इंग्लैंड की टीम ने खिलाड़ियों की सुरक्षा के मद्देनजर जिम्बाब्वे से खेलने से इनकार कर दिया. तब जिम्बाब्वे को 4 अंक मिल गए थे और इंग्लैंड 12 अंकों के साथ नॉकआउट मैचों के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रही, जबकि जिम्बाब्वे की टीम 14 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर रही थी. इसी वर्ल्ड कप में आतंकी हमले की आशंका के मद्देनजर न्यूजीलैंड ने केनिया से मैच खेलने से इनकार करते हुए कहा कि उनके लिए खिलाड़ियों की सुरक्षा सबसे पहले है, बाकी सब चीजें बाद में हैं.
उधर BCCI ने अपने को इस मम्मले से किनारे करते हुए कहा कि अगर सरकार को लगता है कि वर्ल्ड कप में भारत को पाकिस्तान से मैच नहीं खेलना चाहिए तो यह मैच नहीं होगा. उन्होंने कहा कि इस बारे में BCCI ने अभी तक ICC से कोई बात नहीं की है.


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