दिल्ली हाई कोर्ट ने दो सप्ताह में नेशनल हेराल्ड हाउस खाली करने का आदेश दिया है. जस्टिस सुनील गौर की पीठ ने नेशनल हेराल्ड हाउस को खाली कराने से जुड़ी याचिका पर अपना फैसला सुनाया.
सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है. नेशनल हेराल्ड मामले में आये इस फैसले के पूर्व दस सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी 2011-12 के टैक्स आंकलन के मामले को दोबारा खोले जाने पर भी दोनों नेताओं को राहत देने से साफ इनकार कर दिया था. तब हाई कोर्ट ने कहा था कि टैक्स संबंधी पुराने मामलों की आयकर विभाग फिर से जांच कर सकता है. ज्ञात है कि हाई कोर्ट के इस फैसले को दोनों नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए नेशनल हेराल्ड और यंग इंडिया से जुड़े टैक्स एसेसमेंट की दोबारा जांच के आयकर विभाग के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी.
नेशनल हेराल्ड की कंपनी एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड (AJL) ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर नेशनल हाउस की लीज रद करने के फैसले को चुनौती दी थी, इस मामले में कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 22 नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 21 दिसम्बर को कोर्ट ने AJL की याचिका खारिज करते हुए कहा कि दो सप्ताह में नेशनल हेराल हाउस करना होगा.
नेशनल हेराल्‍ड उन अखबारों की श्रेणी में है, जिसकी बुनियाद आजादी के पूर्व पड़ी थी. 1938 में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेराल्‍ड अखबार की नींव रखी थी, उस वक्‍त वह कांग्रेस की नीतियों के प्रचार प्रसार का मुख्‍य स्रोत था. इसे कांग्रेस का मुखपत्र माना जाता रहा है. हेराल्‍ड दिल्ली एवं लखनऊ से प्रकाशित होने वाला अंग्रेजी अखबार था. इंदिरा गांधी के समय जब कांग्रेस में विभाजन हुआ तो इसका स्‍वामित्‍व इंदिरा कांग्रेस आई को मिला. आर्थिक हालात के चलते 2008 में इसका प्रकाशन बंद हो गया.


केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए तुषार मेहता ने इससे पहले कहा कि इंडियन एक्सप्रेस बिल्डिंग से जुड़ा आदेश इस मामले में गलत तरीके से कोड किया गया है. उन्होंने तर्क दिया कि पब्लिक प्रॉपर्टी को जिस वजह से दिया गया, वह हेराल्ड हाउस में कई सालों से किया ही नहीं जा रहा है. ऐसे में यह कहना पूरी तरफ से गलत है कि नेहरू की विरासत को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने बताया कि हेराल्ड हाउस की लीज रद करने से पहले कई बार नोटिस भी दिया गया था.
सुनवाई के दौरान जब हाई कोर्ट ने सरकार के वकील तुषार मेहता से पूछा था कि अब जब हेराल्ड हाउस से अखबार चलाया जा रहा है तो क्या फिर भी बिल्डिंग वापस ली जा सकती है? इस पर मेहता ने कहा था कि उस बिल्डिंग से अखबार शुरू किया गया जब कार्रवाई करने और लीज खत्म करने का फैसला किया गया.
एजेएल की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत के समक्ष फोटोग्राफ पेश करते हुए कहा था कि दो अधिकारी नैशनल हेराल्ड हाउस के परिसर में दाखिल हुए थे, जोकि नहीं होना चाहिए था. सिंघवी ने कहा था कि सभी प्रिंट और प्रेस का काम परिसर से हो, ऐसा जरूरी नहीं है, एक नई प्रिंटिंग प्रेस लगाई जा चुकी है.
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने पटियाला हाउस कोर्ट में नैशनल हेराल्ड मामले में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल, यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी और अन्य ने साजिश के तहत मात्र 50 लाख रुपये का भुगतान कर इसमें धोखाधड़ी की है. जिसके जरिए यंगइंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 90.25 करोड़ रुपये की वह रकम वसूलने का अधिकार हासिल कर लिया, जिसे असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को कांग्रेस को देना था. इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नाडिस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और यंग इंडिया कंपनी आरोपी हैं. फिलहाल सभी आरोपी जमानत पर हैं.



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