कोर्ट के बाहर अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए बैठकों का दौर जारी, अयोध्या में होगी अगली बैठक

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आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर के साथ अयोध्या राम मंदिर-मस्जिद विवाद का हल तलाशने के लिए हुए एक बैठक में कुछ बड़े मुस्लिम पक्षकार शामिल हुए. इसमें मुकदमे के मुख्य पक्षकार सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारूकी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना सलमान नदवी भी शामिल हुए. supri
ज्ञात है कि जफर फारूकी उस वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष हैं, जो 1951 से इस बाबरी मस्जिद पर दावे की लड़ाई लड़ रहा है. फारूकी भी अदालत के बाहर समझौते के लिए तैयार हैं. श्रीश्री से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर सभी पक्ष समझौता चाहें तो मैं पहले से उनके साथ हूं. सलमान नदवी उस पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रभावशाली सदस्य हैं जिसने प्रस्ताव पारित किया है कि मस्जिद के पक्षकार किसी तरह के समझौते में शामिल नहीं होंगे.
तीन से चार घंटे तक चली इस बैठक में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी अधिकारी मौलाना सलमान हुसैनी नदवी, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारूकी, पूर्व आईएएस अधिकारी अनीस अंसारी, अधिवक्ता इमरान अहमद, टीले वाली मस्जिद के मौलाना वासिफ हसन वैजी, ऑब्जेक्टिव रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट के निदेशक अतहर हुसैन शामिल रहे.
श्री श्री के प्रवक्ता गौतम ने बताया कि बैठक में बेंगलुरु के भी कुछ संगठन शामिल हुए, कुल 16 संगठनों ने प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने कहा कि श्री श्री रविशंकर का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि यह मुद्दा जल्द से जल्द सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटा लिया जाए. लोगों से बात चल रही है. अगले महीने बैठक की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. मार्च में होने वाली बैठक के पहले एक बार फरवरी में श्री श्री रविशंकर अयोध्या जाएंगे.
सलमान नदवी ने श्री श्री से मुलाकात पर कहा कि कोर्ट का फैसला जब आएगा तो यह संवैधानिक होगा. कोर्ट अपना फैसला लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर नहीं करता. कानूनी फैसले एक के पक्ष में और दूसरे के खिलाफ होते हैं. हम चाहते हैं कि सभी पक्षों का दिल रखा जाए और सब फैसले से खुश हों.
अतहर हुसैन ने कहा कि बैठक में विवाद के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई. हिंदुओं और मुसलमानों के बीच बढ़ती दूरियों पर बात की गई. इस मुद्दे पर अब अगली बैठक मार्च में रखी गई है. यह बैठक अयोध्या में होगी, जहां संत और मौलाना मिलकर बात करेंगे.
जफर फारूकी ने कहा कि वक्फ बोर्ड हर तरह से समझौता करने को राजी है. दोनों पक्षों का एक साथ बैठकर बात करना जरूरी है.


कुछ वक्त पहले श्रीश्री रविशंकर ने ऐसी कोशिश शुरू की थी, मगर हिंदु और मुस्लिम किसी भी पक्ष से अच्छा रिसपॉन्स नहीं मिला था. सुन्नी बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने श्रीश्री से मिलने से इनकार कर दिया था. उनके अयोध्या पहुंचने पर मंदिर के पुराने पक्षकार निर्मोही अखाड़े ने उनका स्वागत किया था, लेकिन VHP के लोगों ने विरोध किया था.
इस बार हुयी मीटिंग की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना सलमान नदवी ने कहा कि कुछ शर्तों के साथ मस्जिद कहीं और बनाई जा सकती है. श्रीश्री के सामने उन्होंने फिलहाल तीन मांगें रखी हैं. एक बाबरी मस्जिद गिराना अपराध था उसके आरोपियों पर जल्द मुकदमा चला कर सजा दी जाए. दूसरा जितने में मस्जिद थी उसकी दोगुना जमीन किसी मुस्लिम इलाके में दी जाए. तीसरा मुसलमानों के लिए यूनिवरसिटी खोली जाएं क्योंकि वे पढ़ाई में पिछड़ें हैं. उन्होंने कहा कि हम्बली सेक्टर में मस्जिद को शिफ्ट करने की बात कही गई है.
पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष कल्बे सादिक ने पिछले साल अगस्त में मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा था कि अगर मुसलमान अयोध्या में जमीनी विवाद का मुकदमा जीत भी जाएं तो भी उन्हें वह जगह मंदिर बनाने के लिए हिंदू भाइयों को दे देनी चाहिए. क्योंकि ज्यादातर हिंदू भाइयों की आस्था है कि भगवान राम उसी जगह पैदा हुए थे. इस तरह आप एक प्लॉट हारेंगे लेकिन करोड़ों दिल जीत लेंगे. हाँलाकि उनके बयान के बाद काफी विवाद हुआ था, कट्टर और पुरानी सोच के लोग उनके विरोध में आ गए थे.
उधर शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रिजवी विवादित जमीन मंदिर के लिए देने की लगातार पैरवी करते रहे हैं.
अभी मस्जिद के लिए पैरवी करने वालों में ज्यादातर शिया उलेमा रहे हैं. इस पर कुछ लोग यह भी कहते रहे हैं आम तौर पर शिया मंदिर बनाने के पक्ष में हैं लेकिन सुन्नी तैयार नहीं है. सुन्नी के अध्यक्ष ने कहा कि देश के कानून के मुताबिक वक्फ की जमीन को उन्हें किसी को बेचने या ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं है, इसके लिए सरकार को कानूनी रास्ते तलाशने होंगे.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित जमीन को तीन बराबर हिस्सों में सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बांटने का फैसला दिया था, इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के अंदर सभी दस्तावेज अंग्रेजी में कोर्ट में पेश करने को कहा है, मामले पर अगली सुनवाई 14 मार्च को होनी है.

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