फ़ेसबुक के CEO मार्क ज़ुकरबर्ग ने Harvard के छात्रों और गणमान्य अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘कोई भी आईडिया तब तक पूरा नहीं होता, जब तक आप उस पर काम नहीं करते’. अब जैसे मुझे ही ले लीजिये यदि मुझे पहले से ही पता होता कि लोगों को कैसे जोड़ना है, तो शायद फ़ेसबुक न बन पाता.
मार्क ज़ुकरबर्ग ने Harvard में रहते हुए 2004 में फ़ेसबुक की स्थापना की थी, जिसके बाद अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी. मार्क के योगदान को देखते हुए Harvard ने 25 मई को उन्हें डिग्री दे कर सम्मानित करने का फ़ैसला लिया. इस अवसर पर यहाँ बिताये पलों और उससे जुड़ी कई यादों को मार्क ने लोगों के सामने रखा, जिसे पहले उन्होंने किसी के साथ शेयर नहीं किया था.
समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए मार्क ने कहा कि- ये सच है कि Harvard में रहने के दौरान मैंने कभी किसी चीज़ को पूरा नहीं किया. यदि आज मैं यहां अपना भाषण पूरा करता हूं, तो ऐसा पहली बार होगा कि Harvard में मैंने किसी काम को पूरा किया हो.
‘Harvard में रहने के दौरान मैंने प्रैंक वेबसाइट Facemash को लॉन्च किया, जिसके बाद एडमिनिस्ट्रेशन ने मुझे हाज़िर होने के लिए कहा. हर किसी को यही लग रहा था कि मुझे यूनिवर्सिटी से निकाल दिया जायेगा. मेरे माता-पिता भी यहां आ चुके चुके थे. मेरे दोस्तों ने मेरी विदाई के लिए एक पार्टी भी रखी थीl मैं पहली बार Priscilla से मिला, हम दोनों बाथरूम के बाहर लाइन में खड़े थे. Priscilla को देखते ही मेरे दिमाग़ में प्यार की घंटी बज चुकी थी. मैंने उससे कहा कि मैं तीन दिनों में यहां से निकाल दिया जाऊंगा, इसलिए हमें जल्दी से डेट पर चलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आदर्शवादी होना वाकई में बहुत अच्छा है, पर इसके साथ ही खुद को इसके लिए तैयार करिये कि लोगों के ग़लत कहने के बावजूद भी आप अडिग रहें. दरअसल जो बड़ा सोचते हैं, लोगों की नज़रों में अकसर पागल होते हैं. सिस्टम पर निशाना साधते हुए मार्क ने कहा कि ‘यहां से जाने के दस सालों के अंदर ही मैंने बिलियन डॉलर से ज़्यादा कमा लिए, जबकि लाखों ऐसे छात्र हैं, जो अपना लोन भरने में भी समर्थ नहीं हैं.
मार्क ने कहा कि हमारी पिछली पीढ़ी वोट और सिविल अधिकारों के लिए लड़ी थी, जिन्होंने एक लोकतांत्रिक समाज की नींव रखी थी. अब हमारी बारी है कि सोशल कॉन्ट्रैक्ट को बढ़ा कर इसकी नयी परिभाषा लिखें. ग्लोबली हमें ऐसे आईडिया ढूंढने हैं, जो हर व्यक्ति को जॉब दिला सकें और ऐसे आईडिया पर ध्यान लगाने के लिए हमें हेल्थ और बुनियादी संसाधनों की टेंशन से छुट्टी चाहिए.
मार्क ने कहा कि इतिहास में ऐसे लोगों की भरमार रही है, जिन्होंने मदद के लिए अपने खजाने खोले हैं. कई ऐसे लोग हैं, जो एक बार दान करके दूसरी जगहों से पैसा कमा लेते हैं. ये ज़रूरी नहीं कि मदद सिर्फ़ पैसों से ही की जाये. आप थोड़ा-सा वक़्त निकाल कर भी अपनी क्षमता के अनुरूप किसी की मदद कर सकते हैं.
मार्क ने कहा कि हर पीढ़ी, लोगों के एक चक्र को आगे बढ़ाती है और हम उस पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिसमें समय अस्थिर हो चुका है. भूमंडलीकरण की वजह से पूरे विश्व में कई लोग पीछे रह गए हैं. ऐसे में ज़रूरत है कि हम आगे बढ़ने के बजाय भीतर की ओर झांके.

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