केंद्रीय मंत्रियों की क्लास में बोले अमित शाह; 2019 में 360 से ज्यादा सीटें जीतनी हैं

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भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 360 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखते हुए तैयारी शुरू कर दी है. शाह ने वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक बुलाई और उनसे चुनाव के लिए कमर कस लेने का आह्वान किया.
अमित शाह कहा कि 150 लोक सभा सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा हारी थी, वहां मेहनत करने के लिए अभी से जुट जाएं. बैठक में कुल 31 नेता बैठक में शामिल हुए, उनके बीच सीटों को लेकर प्रजेंटेशन भी दिया गया. शाह ने मंत्रियों से कहा कि ऐसी सीटों को चुनकर इन पर अगले दो साल लगातार मेहनत करनी होगी.
भाजपा मुख्यालय में हुई इस बैठक में केंद्र सरकार की योजनाओं के ग्राउंड रिपोर्ट की जानकारी भी मंत्रियों से ली गई. बैठक में अनंत कुमार, रविशंकर प्रसाद, नरेंद्र सिंह तोमर, जेपी नड्डा, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, निर्मला सीतारमण, मनोज सिन्हा, प्रकाश जावड़ेकर और अर्जुन मेघवाल आदि शामिल हुए. अमित शाह ने सभी मंत्रियों और नेताओं से जानकारी ली कि केंद्र सरकार और उनके मंत्रालय से सम्बंधित योजनाएं ज़मीन पर किस स्तर पर पहुंची हैं.


बैठक में भाजपा महासचिवों में राम माधव, मुरलीधर राव, अनिल जैन, कैलाश विजयवर्गीय और अरुण सिंह, संगठन महामंत्री राम लाल, सह संगठन महामंत्री वी सतीश, सौदान सिंह, शिव प्रकाश और संतोष कुमार को बुलाया गया था. इनके अलावा भाजपा शासित राज्यों से भी कुछ वरिष्ठ नेताओं को बुलाया गया था. संगठन की ओर से मंत्रियों को कई ज़िम्मेदारियां भी दी गयीं, जिनमें दलितों के घर भोजन करना शामिल है. इन सब से अन्य कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी ली गई.
शाह को प्रधानमंत्री मोदी का दाहिना हाथ माना जाता है. इन दोनों ने भाजपा को ऐसी ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जिसकी 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. मोदी ने उस चुनाव में उत्तर प्रदेश के प्रभारी के रूप में NDA को 73 सीटें दिलाने वाले अमित शाह को पूरे चुनाव का ‘मैन ऑफ द मैच’ बताया था. शाह के अध्यक्ष रहने के दौरान पार्टी का तेजी से विस्तार हुआ है और इसने गोवा, मणिपुर तथा अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी राजनीतिक गुणाभाग से सत्ता हासिल की है. आज देश के 13 राज्यों में भाजपा की और 5 अन्य में वह गठबंधन का हिस्सा रहते हुए सरकार चला रही है.
अमित शाह ने पिछले तीन साल में देश के हर राज्य का दौरा किया है. औसतन रोज 541 km का सफर, ज्यादातर सड़क से सफर, 500 से ज्यादा रैलियां और 110 दिनों का देशभर में सघन प्रवास करने वाले भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं. RSS की तर्ज पर फुल टाइम वर्कर्स (प्रचारक) का कॉन्सेप्ट लाये.

2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजे में 31.3% वोट शेयर के साथ भाजपा 282 सीटें, 19.5% वोट शेयर के साथ कांग्रेस 44 सीटें, 3.9% वोट शेयर के साथ TMC 34 सीटें, 3.3% वोट शेयर के साथ AIADMK 37 सीटें और 1.7% वोट शेयर के साथ BJD 20 सीटें जीती थी. इस बार तेलंगाना, आंध्र और बंगाल में पार्टी ज्यादा फोकस करेगी.
जदयू के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाने के बाद अब भाजपा देश की 67% आबादी और 58% इकोनॉमी पर शासन कर रही है, भाजपा के इतिहास में ऐसा मुकाम पहली बार हासिल हुआ है. तमिलनाडु (AIADMK) और ओडिशा (BJD) जैसे राज्य में भाजपा या उसके सहयोगी की सरकार नहीं है. लेकिन इन दोनों पार्टियों का झुकाव भी भाजपा की ओर ही दिख रहा है. राष्ट्रपति चुनाव में भी दोनों पार्टियों ने NDA के रामनाथ कोविंद के पक्ष में वोट डाले थे.
उधर 130 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी के पास केवल एक बड़ा स्टेट कर्नाटक बचा है. जहां बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा 2018 में मजबूत स्थिति के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रही है. जिन राज्यों में गैर भाजपा या गैर कांग्रेस की सरकार है, उनमें केरल और प. बंगाल ही अहम हैं.
इसी महीने कैबिनेट में फेरबदल की संभावना भी जताई जा रही है, जो सम्भवतः इस कैबिनेट का अंतिम फेरबदल हो. अनिल माधव दवे के निधन, मनोहर पर्रिकर के गोवा CM और वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति बनने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में कुछ पद खाली हैं. मंत्रियों पर एक से ज्यादा मंत्रालयों का भार है, तथा जदयू से गठबंधन होने के बाद उसके भी मंत्री बनने हैं.

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