कुएं में मिलाया ज़हर ताकि दलित पानी न भर सकें

 142 



हमें आये दिन ऐसे कई लोग मिल जायेंगे, जो आरक्षण को ख़त्म करने या इस पर दोबारा चर्चा करने की बात करते मिलेंगे. परन्तु हाल ही में कर्नाटक की एक घटना से ऐसा लगता नहीं कि अभी भी हिंदुस्तान जातिवादी दंश से ऊपर उठ बराबरी की बात करने वाला देश बन पाया है. जहाँ एक व्यक्ति ने सार्वजनिक कुंए में सिर्फ़ इसलिए ज़हर डाल दिया ताकि गांव के दलित उस कुंए के पानी का इस्तेमाल न कर सकें.
हमें सोशल मीडिया से ले कर अपने वास्तविक जीवन कई ऐसे लोग मिलते रहते हैं, जो आरक्षण को ख़त्म करने या इस विषय पर दोबारा चर्चा करने की बात करते हैं. वास्तव में ऐसे लोग अपने अगल- बगल देखकर या कुछ सतही बातों के आधार पर इस चर्चा में शामिल रहते हैं. पर हक़ीक़त में आज भी ग्रामीण भारत की तस्वीर काफी भयावह है.
इसका एक बड़ा ज्वलंत उदाहरण सामने आया है कर्नाटक के कलबुर्गी ज़िले के चन्नुर गांव से, जहाँ सवर्ण जाति के एक व्यक्ति ने एक सार्वजनिक कुंए में सिर्फ़ इसलिए ज़हर डाल दिया, ताकि गांव के दलित कुंए के पानी का इस्तेमाल न कर सकें. इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि जातिवाद के दंश से ऊपर उठ हिंदुस्तान अभी भी बराबरी की बात करने वाला देश नहीं बन पाया है.

बताया जाता है कि चन्नुर गांव में करीब सात कुंए हैं, जिनमें से केवल एक कुंए से दलित पानी भर सकते थे. गांव की सीमा से करीब 200 मीटर बाहर यह कुंआ एक दलित की ज़मीन पर है. दलित ने उस जमीन को चार साल पहले गांव के एक सवर्ण को किराए पर दिया था. ज़मीन किराए पर लेने के बाद से वो हमेशा इस कोशिश में रहता था कि कोई भी दलित कुंए से पानी न भर पाए. अपने इस प्रयास के तहत वो कभी कुंए में मरा हुआ कुत्ता, बिल्ली तो कभी सांप डाल देता था. दलितों का आरोप है कि कई मौकों पर वह हाथापाई कर चुका है और जान से मारने की धमकी भी दे चुका है. इसके बावजूद दलित किसी तरह से काम चला रहे थे.
कुछ दिनों पहले दलितों ने महसूस किया कि कुंए के पानी के स्वाद में फ़र्क आने लगा है, जिसके बाद 29 अगस्त से उन्होंने कुंए से पानी लाना छोड़ दिया, पर ऊंची जाति के लोगों ने उन्हें गांव के अन्य कुओं से भी पानी नहीं लेने दिया. बात अधिकारीयों तक पहुंचने और जाँच होने पर पता चला कि कुंए में कई देशों में प्रतिबंधित Endosulfan नामक एक ज़हर मिलाया गया था, जो इंसान के दिमाग़ पर सीधा असर करने के साथ ही उनके जनांगों पर भी प्रहार करता है.
मामला प्रकाश में आने के बाद उस व्यक्ति पर अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकारों की रक्षा सेक्शन 3 के तहत केस दर्ज किया गया है.

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए Pileekhabar के Facebook पेज को लाइक करें

loading…


Loading…



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *