मकर संक्रांति के मौके पर कड़ाके की सर्दी में मंगलवार को प्रातः 5 बजे से शाही स्नान के साथ ही प्रयागराज में कुंभ प्रारंभ हो गया. सर्वप्रथम अलग-अलग अखाड़ों के साधु संतों ने गंगा में डुबकी लगायी. पहले दिन शाही स्नान के मौके पर हेलिकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई.
केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति को निरंजनी अखाड़े का कल ही महामंडलेश्वर बनाया गया है, वह भी इस पावन पर्व पर कुंभ के शंखनाद की साक्षी बनीं. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी पहले शाही स्नान पर संगम में डुबकी लगायी. जूना अखाड़ा में पहली बार शामिल किन्नर अखाड़ा ने भी संगम पट पर स्नान किया. मकर संक्रांति पर कुंभ के प्रथम शाही स्नान पर्व में मंगलवार दोपहर 12 बजे तक लगभग 85 लाख श्रद्धालुओं द्वारा प्रयागराज में डुबकी लगाया गया.
सुबह सबसे पहले 6 बजे महानिर्वाणी के साधु-संत पूरे लाव-लश्कर के साथ शाही स्नान के लिए संगम तट पर पहुंचे और इसी के साथ अखाड़ों के स्नान का क्रम प्रारंभ हुआ. पूरे धूमधाम से शोभा यात्रा निकालते हुए निरंजनी और आनंद अखाड़े के साधु संतों ने भी संगम तट पर शाही स्नान किया कुंभ मेला में कुल 13 अखाड़े हैं, इनमें 7 शैवा तथा तीन-तीन वैष्णवा और उदासीन अखाड़े हैं. संन्यासी, बैरागी और उदासीन भागों में बांटे गये अखाड़ों में सबसे पहले संन्यासी फिर बैरागी और अंत में उदासीन के अंतर्गत आने वाले अखाड़ों के संत स्नान करेंगे. सभी अखाड़ों को बारी-बारी से स्नान के लिए 30 मिनट से 45 मिनट तक का समय दिया गया है.
हर तपस्वी की यही इच्छा होती है कि वो धर्म के सबसे बड़े मेले में संगम तट पर शाही स्नान का हिस्सा बनें. ऐसे में सालों बाद जब ये मौका आया तो कड़ाके की ठंड को भी मात देते हुए सभी संन्यासियों ने शाही स्नान किया. साधु-संतों के साथ आम श्रद्धालु भी संगम सहित अलग-अलग घाटों पर आधी रात से ही स्नान कर रहे हैं. कड़ी सुरक्षा के बीच घाटों पर नहाने और पूजा पाठ का सिलसिला अनवरत जारी है. किंवदंतियों के अनुसार पहला शाही स्नान स्वर्ग का दरवाजा खोलता है
कुंभ मेले में मकर संक्रांति (15 जनवरी), पौष पूर्णिमा (21 जनवरी), मौनी अमावस्या (4 फरवरी), वसन्त पंचमी (10 फरवरी), माघी पूर्णिमा (19 फरवरी) और आखिरी स्नान महाशिवरात्रि (4 मार्च) विशेष महत्व माना गया है. कुंभ मेले का आखिरी स्नान महा शिवरात्रि के दिन 4 मार्च को होगा. ऐसा माना जाता है कि इस दिन का देवलोक में भी इंतज़ार रहता है.
कुंभ के मेलाधिकारी विजय किरन आनंद के अनुसार संगम स्नान रात्रि लगभग ढाई बजे से ही शुभ मुहूर्त में शुरू हो गया है और अनुमान है कि शाम तक लगभग सवा करोड़ लोग स्नान करेंगे. दस डिग्री सेल्सियस से भी कम पारा होने के बावजूद बड़ी तादाद में साधु-संतों के साथ- साथ आम श्रद्धालु भी संगम सहित अलग-अलग घाटों पर आधी रात से कड़ी सुरक्षा के बीच घाटों पर स्नान और पूजा पाठ कर रहे हैं. कुंभ मेले में अगले 45 दिनों तक देश-विदेश के 15 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के जुटने की सम्भावना है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कुंभ मेले के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से पहली बार बनाये गये इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर का उद्घाटन किया था. कुंभ में चालीस हज़ार LED लाइट लगाई गई हैं. मेले में करीब 500 सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, लेज़र शो के ज़रिए भी सांस्कृतिक कार्यक्रम की व्यवस्था की गयी है. इसके साथ-साथ पेंटिंग, स्टैट्यू सहित विभिन्न प्रदर्शनी से जुड़े कार्यक्रम भी होंगे. शहर में तमाम जगहों पर टीवी स्क्रीन भी लगाए गए हैं. श्रद्धालुओं के लिए गंगा नदी के किनारे कुल 3,200 एकड़ क्षेत्र में एक छोटा सा शहर ही बसाया गया है. यहां टेंट का किराया 2,100 रुपये से लेकर 20,000 रुपये प्रति रात तक है. इसके अलावा बड़ी संख्या में यहां पहुंचने वाले अखाड़ों और संतों के लिए डोर्मेटरी और टेंट स्टॉल भी लगाए गए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुंभ के पहले दिन लोगों को शुभकामनाएं देते हुए ट्विटर पर लिखा- “प्रयागराज में आरंभ हो रहे पवित्र कुंभ मेले की हार्दिक शुभकामनाएं. मुझे आशा है कि इस अवसर पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं को भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विविधताओं के दर्शन होंगे. मेरी कामना है कि अधिक से अधिक लोग इस दिव्य और भव्य आयोजन का हिस्सा बनें.”



loading…

Loading…






Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *