नोटबंदी के जरिए अर्थव्‍यवस्‍था में कैश के रूप में मौजूदा काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक करने के बाद मोदी सरकार की नजर चल या अचल सं‍पत्ति के तौर पर देश में मौजूद काले धन पर है। प्रॉपर्टी के रूप में अकूत काला धन रखने वालों की पहचान करने की दिशा में केंद्र सरकार ने काम शुरू भी कर दिया है।
मोदी सरकार की टेढ़ी नजर घर या जमीन के तौर पर मौजूद बेनामी प्रॉपर्टी पर ज्यादा है। आम तौर पर लोग अपने परिवार के सदस्‍य या नौकरों/ परिचितों के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदते हैं और इस प्रॉपर्टी को ITR में डिक्‍लेयर नहीं करते हैं, इन अनडिक्‍लेयर्ड प्रॉपर्टी को ही बेनामी माना जाएगा।
इनकम टैक्‍स विभाग सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार के निशाने पर ऐसे प्रॉपर्टी होल्‍डर है जिनके नाम पर मकान, फ्लैट, प्‍लॉट या कार है, लेकिन इन्होंने कभी इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल नहीं किया है। इनकम टैक्‍स विभाग डाटा एनालिटिक्‍स के जरिए ऐसे लोगों की पहचान कर रहा है।


दसलाख से अधिक वैल्‍यू की प्रॉपर्टी की खरीद या बिक्री के लिए पैन देना पड़ता है। इसी तरह अगर कार या दूसरा मोटर व्‍हीकल खरीदी जाती है तो भी पैन देना है। ऐसे में सरकार के पास डाटा है कि किसके पास चल या अचल संपत्ति है।
इनकम टैक्‍स विभाग आपके पैन कार्ड के जरिए ही यह जान सकता है कि जिसके नाम पर प्रॉपर्टी है वह इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल कर रहे हैं या नहीं। अगर उन्होंने कभी इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल नहीं किया है तो इनकम टैकस विभाग उन्हें नोटिस भेज कर पूछ सकता है कि आपकी इनकम कितनी है और आपने अब तक इनकम टैक्‍स रिटर्न क्‍यों नहीं फाइल किया है।
यानी कि अगर किसी व्‍यक्ति के पास उसकी खरीदी चल या अचल संपत्ति है और वह इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल नहीं करता है तो उसके लिए आने वाले समय में मुश्किल खड़ी हो सकती है। अगर वह व्‍यक्ति इनकम टैक्‍स विभाग के सामने यह साबित नहीं कर पाया कि यह प्रॉपर्टी उसके अपने ही इनकम से खरीदी गई है या इनकम टैक्‍स विभाग यह साबित कर देता है कि यह प्रॉपर्टी किसी दूसरे के पैसे से खरीदी गई है तो इस मामले में बेनामी प्रॉपर्टी कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है। हाँलाकि इस मामले में यह साबित करने की जिम्‍मेदारी इनकम टैकस विभाग की होगी कि खरीदी गई प्रॉपर्टी के लिए किसी और ने पैसा दिया है या करप्‍शन का पैसा है।

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए Pileekhabar के Facebook पेज को लाइक करें

loading…


Loading…



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *