अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में भारतीय दूतावास के 1.5 किलोमीटर दूर ईरानी दूतावास के करीब धमाका हुआ है. अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार कार में बैठे सुसाइड बॉम्बर ने खुद को उड़ा लिया.
धमाका इतना तेज था कि कई किलोमीटर तक इसकी आवाज सुनी गई. धमाके के बाद 30 से ज्यादा वाहन नष्ट हो गए हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इस हमले में कम से कम 49 लोगों की मौत हुई जबकि 320 से ज्यादा लोग घायल है। इससे पहले इसी साल मार्च में ISIS ने काबुल में अमेरिकी दूतावास को भी निशाना बना गया था, जिसमें 30 लोगों की मौत हुई थी.
यह धमाका काबुल के उस इलाके में हुआ है जहां कई देशों को दूतावास है. यहां से राष्ट्रपति भवन भी नजदीक ही है. अफगानिस्तान की पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्री के प्रवक्ता इस्माइल कवासी ने 19 लोगों की मौत और 319 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है. वहीं भारतीय दूतावास में मौजूद सभी भारतीय कर्मचारी सुरक्षित हैं. ब्लास्ट के बाद भारतीय दूतावास की इमारत के दरवाजों और खिड़कियों को भी नुकसान पहुंचा है. भारतीय दूतावास सुरक्षित है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान में हुए बम धमाके की निंदा करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है. PM ने कहा कि भारत अफगानिस्तान की आतंक के खिलाफ हर लड़ाई में साथ है. जो आंतक को सपोर्ट कर रहे हैं उन्हें हराया जाना जरूरी है. भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर बताया है कि भारतीय दूतावास का स्टाफ सुरक्षित हैं.
धमाके के बाद आसपास धुएं का गुबार दिखाई दिया, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि धमाका कितना ज़ोरदार था. बताया जाता है कि हमलावर का निशाना भारतीय दूतावास से 1.5 किलोमीटर दूर स्थित ईरानी दूतावास था. धमाका काबुल के वजीर अकबर खान इलाके में हुआ .
इससे पूर्व 13 मई को काबुल में एक कार पर हथगोले से किए गए हमले में कम से कम तीन नागरिकों की मौत हो गई थी. गृह मंत्रालय के उपप्रवक्ता नजीब दानिश के अनुसार हमले में मरने वालों में जल आपूर्ति विभाग की दो सरकारी महिला कर्मचारी और एक छोटा बच्चा है. जबकि गाड़ी का चालक जख्मी हो गया. किसी समूह ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. दानिश ने बताया कि एक दिन पहले ही, तालिबान नियुक्त उप गवर्नर और जिला प्रमुख सहित 10 विद्रोही समंगान प्रांत में मारे गए थे.
मार्च में भी काबुल में सैन्य अस्पताल में डॉक्टरों के भेष में आतंकियों ने हमला कर दिया था. तंकवादियों के साथ सुरक्षाकर्मियों की छह घंटे चली मुठभेड़ में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. वहीं फरवरी महीने में भी अफगानिस्तान की राजधानी काबुल स्थित सुप्रीम कोर्ट में एक आत्मघाती हमलावर ने कर्मचारियों की भीड़ के बीच धमाका कर दिया. इस घटना में 20 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 41 अन्य घायल हो गए थे.

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