कांग्रेस या उसके नेता हमें चुनाव कराना न सिखाएं : चुनाव आयोग

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निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि कांग्रेस या उसके नेता जैसा चाहते हैं, उस तरीके से देश में चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग बाध्य नहीं. कांग्रेसी नेता कमलनाथ की ओर से दायर याचिका का विरोध करते हुए आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जिसे नियम और कानून के अनुसार काम करना है न कि राजनैतिक दलों के निदेश पर.
आयोग ने अपने हलफनामें में कहा कि भारत के निर्वाचन आयोग के काम करने के तरीके पर सवाल उठाना याचिकाकर्ता या उनके संगठन के क्षेत्राधिकार में नहीं है. साथ ही एक ही मुद्दे को लगातार उठाकर वो संवैधानिक निकाय के कामकाज में हस्तक्षेप नही कर सकते और न ही कोर्ट का समय बर्बाद कर सकते हैं. कमलनाथ या उनकी पार्टी निर्वाचन आयोग को किसी विशेष तरीके से चुनाव करने के लिए निदेशित नहीं कर सकते हैं.
साथ ही चुनाव आयोग ने कहा कि याचिका में आयोग पर लगाए गए आरोप गलत, बेबुनियाद और भ्रामक हैं, क्योंकि वह ईसी को अपनी निजी इच्छाओं और प्रशंसकों के अनुसार चुनाव कराने के लिए निर्देशित कर रहे हैं. सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा है कि वह अपना काम कर रहा है. उसके काम में ऐसी याचिकाओं के जरिए दखल देना उचित नहीं है. आयोग ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहते हैं कि हमें निर्देश दिए जाएं कि निर्वाचन प्रक्रिया किस तरह से हो.


हलफनामें में यह कहा गया, याचिकाकर्ता और राजनीतिक दल / संगठन द्वारा गिए गए सुझाव को स्वीकार .करने के लिए ईसी को बाध्य नहीं किया जा सकता. इसमें आगे कहा गया कि ईसी अपनी भूमिका और कर्तव्यों को लेकर सतर्क है. साथ ही ईवीएम की खरीद और सुरक्षा सुनिश्चित करने, वीवीपीएटी की छपाई, मशीनों की मॉक टेस्टिंग, अधिकारियों की तैनाती आदि सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं.
हलफनामे में कहा गया कि याचिकाकर्ता का वीवीपैट मशीनों में खराबी का आरोप पूरी तरह से झूठा और भ्रामक हैं. गुजरात के किसी अन्य कांग्रेस नेता द्वारा दायर की गई इसी तरह की याचिका पर शीर्ष अदालत ने पहले भी विचार-विमर्श किया है इसलिए, पार्टी और उसके सदस्यों द्वारा हर विधानसभा से पहले एक ही मुद्दे को उठाने का कोई औचित्य नहीं है. आयोग का कहना है कि कांग्रेस की याचिका आधारहीन है और इसलिए सुप्रीम कोर्ट कमलनाथ की याचिका खारिज करे.
ज्ञात है कि कांग्रेस की मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की इकाइयों के प्रमुखों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर कहा था कि चुनाव आयोग फर्जी वोटरों का नाम वोटर लिस्ट से हटाए. यह अपील कमलनाथ, सचिन पायलट और भूपेश बघेल ने की थी. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इसी साल चुनाव होने हैं.

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