कितना अच्छा लगता है जब कोई भारत देश का आदमी विदेशों में जाकर अपने देश का नाम रौशन करता है और वहां का कोई बड़ा अधिकारी बन जाता है।
ऐसा ही कुछ हुआ है इंग्लैंड में जहां ग्रेवशैम शहर में यूरोप के सबसे युवा सिख मेयर बनने वाले तनमनजीत सिंह ढेसी उर्फ टैन ढेसी ब्रिटेन की संसद हाऊस ऑफ कॉमन्स के पहले सिख सांसद बन गए हैं।
जालंधर के रायपुर गांव के तनमनजीत सिंह ने यूके में वहां के लोकल कैंडिडेट्स को हराकर को हराया। उन्होंने कंजरवेटिव पार्टी के उम्मीदवार मार्क विविस को 17,000 वोटों से हराकर ये जीत हासिल की। बता दें की ढेसी के साथ वीरेंद्र शर्मा को भी साऊथ हाल के ईलिंग्स से लगातर चौथी बार MP चुना गया है। ये दोनों पंजाब मूल के हैं।

तनमनजीत सिंह ढेसी ने अपनी पढ़ाई जालंधर से पूरी की और फिर वे UK चले गए और वहां ओक्सफोर्ड और कैंब्रिज इंटरनैशनल यूनिवर्सिटी से स्टडीज पूरी की वहीं दूसरी ओर वीरेन्द्र शर्मा ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्ससे स्टडी की है।
टैन ढेसी ग्रेवशैम के स्थानीय पार्षद हैं और लेबर पार्टी की ‘चेयर आफ द ग्रेवशैम’ के लिए टैन ढेसी का दो बार चयन किया गया था और वहीं वीरेंद्र शर्मा जब पंजाब से इंग्लैंड गए थे तो वह बस कंडक्टर के तौर पर नौकरी करने लगे और बाद में उन्होंने अपना सियासी सफर शुरू किया।
इंग्लैंड के इन दोनों सांसदों का फगवाड़ा से गहरा संबंध है। टैन ढेसी का परिवार फगवाड़ा के जसदिल मैंशन में रहता है। वीरेंद्र शर्मा का बचपन फगवाड़ा के साथ लगते गांव मंढाली में बीता और वह जब भी भारत आते हैं तो फगवाड़ा में लंबा समय बिताते हैं। इस तरह फगवाड़ा उनका एक तरह से घर ही है।

इंग्लैंड के इलेक्शन में पहले सिख सांसद बने टैन ढेसी के इलेक्शन प्रचार के लिए उनके पिता जसपाल ढेसी व मां दलविंदर कौर ढेसी (बीबी ढेसी) काफी दिनों से इंग्लैंड में हैं।
अपनी जीत के लिए टैन ने अपने पिता, भाई साहिब सिंह ढेसी व अपनी पत्नी का खास तौर पर धन्यवाद करते हुए कहा कि परिवार की सपोर्ट के बगैर उनकी यह जीत संभव नहीं थी। तनमनजीत सिंह ढेसी के पिता जसपाल ढेसी इंग्लैंड के सबसे बड़े गुरूद्वारा श्री गुरू नानक दरबार के प्रधान भी रह चुके हैं और यही कारण है कि टैन ढेसी को सिख फेडरेशन (यू.के.) का जबरदस्त समर्थन मिला।

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