ऐतिहासिक बैठक में साउथ और नॉर्थ कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण को तैयार

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एक ऐतिहासिक शिखर बैठक में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई-इन ने स्थायी शांति समझौता और विभाजित प्रायद्वीप के पूर्ण निरस्त्रीकरण की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर सहमत हुए.
उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के नेता ने पनमुंजोम घोषणा पर हस्ताक्षर करने के बाद एक दूसरे को गले लगा लिया. दोनों नेताओं ने एक बयान जारी कर, ‘पूर्ण निरस्त्रीकरण और परमाणु मुक्त कोरियाई प्रायद्वीप के साझा लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता जताई.’ परमाणु और मिसाइल परीक्षण पर पाबंदी की उत्तर कोरिया की घोषणा को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने ‘‘बेहद महत्वपूर्ण’’ बताया.
शिखर सम्मेलन के लिए पनमुंजम के युद्धविराम संधि के अधीन आने वाले गांव के दक्षिणी किनारे पर स्थित ‘पीस हाउस बिल्डिंग’ में दाखिल होने से पहले किम के आमंत्रण पर दोनों नेता एक साथ उत्तर कोरिया में दाखिल हुए. किम ने बैठक की शुरुआत होने के बाद मून से कहा, ‘‘मैं यहां एक नए इतिहास का प्रारंभिक संदेश देने के दृढ़ संकल्प के साथ आया हूं.’’ शिखर वार्ता के बाद उन्होंने कहा कि दोनों कोरिया यह सुनिश्चित करेंगे कि वह ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण इतिहास को नहीं दोहराएंगे.’’


संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने दोनों की शिखर बैठक को ‘ऐतिहासिक’ बताते हुए इसकी सराहना करते हुए किम और मून से अपनी प्रतिबद्धताओं को शीघ्र मूर्त रूप देने का आग्रह किया. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ऐतिहासिक बैठक’ की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रायद्वीप में अच्छी चीजें हो रही हैं. चीन के विदेश मंत्रालय ने भी दोनों नेताओं की सराहना करते हुए कहा कि सम्मेलन से इस प्रायद्वीप में दीर्घकालिक स्थिरता के नये दौर की शुरुआत का रास्ता खुला है. अन्य वैश्विक नेताओं ने भी किम और मून की बैठक को ‘ऐतिहासिक’ बताते हुए इसकी सराहना की है.
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई-इन ने इस बात पर भी सहमति जताई कि वे कोरियाई युद्ध के स्थायी समाधान की दिशा में इस साल प्रयास करेंगे और इसके सैन्य हल के बजाए शांतिपूर्ण संधि से इसे खत्म करने की दिशा में पहल की जाएगी. दोनों नेताओं ने ‘‘नियमित बैठकों और सीधे फोन वार्ता’’ करने पर भी सहमति जताई. मून अब प्योंगयोंग का दौरा करेंगे.
यहाँ हाँलाकि किम ने निरस्त्रीकरण का जिक्र नहीं किया है. विश्लेषकों के अनुसार शिखर सम्मेलन की पहल अच्छी है लेकिन साथ ही आगाह किया है कि इस तरह के वादे पूर्व में भी किये गए हैं और उत्तर के परमाणु शस्त्रागार के मुद्दे को सुलझाने के लिए अभी बहुत कुछ किये जाने की जरूरत है.
उत्तर कोरियाई नेता किम और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच आने वाले कुछ हफ्तों में बहु-प्रतीक्षित बैठक होनी है. इससे पहले पनमुंजोम घोषणा ने इस दिन को ऐतिहासिक बना दिया क्योंकि महज कुछ महीनों पहले तक इस पर कोई सोच भी नहीं सकता था जब उत्तर कोरिया लगातार मिसाइलों का परीक्षण और अपना छठा परमाणु परीक्षण किया था. जिसके बाद किम और ट्रंप के बीच वाकयुद्ध भी शुरू हो गया था.

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