वस्‍तु व सेवा कर (GST) एक जुलाई से ही लागू हुआ है और भाई लोगों ने इसे ठेंगा दिखाना शुरू कर दिया। तुम डाल- डाल, तो हम पात- पात के तर्ज़ पर चलने का आदि हो चुका वर्ग अपनी सारी उर्जा नियम- कायदों के काट खोजने में ही लगाता रहता है, काट भी ऐसा जिसे जानकर कोई भी हैरान रह जाए।
चेन्‍नई के एक दुकानदार एक जोड़ी जूते के दो बील बना रहा है, यानी दोनों पैर के जूते का अलग-अलग बील। कपड़ा का एक दुकानदार सलवार और दुपट्टे के अलग-अलग बील बना रहा है। अपने ट्रेडमार्क से बासमती चावल बेचने वाली एक कंपनी अपना ट्रेडमार्क रजिस्‍ट्रेशन ही रद्द करवा रही है। ये सारी कवायद टैक्‍स से बचने या टैक्स की चोरी के लिए किए जा रहे हैं।


GST काउंसिल ने जो नियम बनाये हैं, उनके बीच से ही बच निकलने की जुगत में कुछ व्‍यापारियों ने ये अजीबोगरीब काम शुरू किए हैं ताकि टैक्‍स बचाया जा सके। पांच सौ रुपए से कम के जूते-चप्‍पलों पर 5 प्रतिशत GST है, इससे ज्‍यादा कीमत पर 18 प्रतिशत GST है। वैसे ही एक हजार रुपए से कम के कपड़ों पर और उससे ज्‍यादा के कपड़ों पर अलग- अलग GST है। खाने-पीने की कई चीजों पर GST नहीं लगा है। इन्हीं प्रावधानों का फायदा उठाने के लिए एक जोड़ी जूते का दो बील बनाया जा रहा है, सलवार, समीज और दुपट्टे का अलग- अलग बील बनाया जा रहा है। चावल का ट्रेडमार्क रजिस्‍ट्रेशन रद्द करवाया जा रहा है।
GST से बचने के लिए कारोबारी नई- नई तरकीबें निकालने में व्यस्त हैं, तो आम उपभोक्ता अपनी जेबें ढ़ीली करवाने को बाध्य है। राज्य सरकारें भी GST लागु होने के बाद अपना खजाना भरने का नया- नया तरकीब खोज रही है। महाराष्ट्र सरकार ने GST लागू होने के बाद चुंगी और स्थानीय निकाय कर समाप्त होने से राजस्व का होने वाले नुकसान की भरपाई के लिये निजी दो पहिया और चार पहिया वाहनों पर लगने वाले पंजीकरण कर को दो प्रतिशत बढ़ा दिया है।

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