उपभोग शून्य आदमी को मिले सत्ता : सुमित्रा महाजन

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लोकतंत्र कैसे बेहतर तरीके से चले और खड़ा रहे. इसके सभी स्तंभों में संतुलन कायम रहे. सरकारी पैसा जन-जन तक कैसे पहुंचे. योजनाओं का जमीन तक पहुँचाने का कार्य सिर्फ कानून बनाने से नहीं होगा, लोक जागरण बहुत जरूरी है. सबके सहयोग से इसे किया जा सकता है. विश्व का पहला गणतंत्र बिहार में वैशाली था. ऐसे जगह पर हम विचार करेंगे, चर्चा करंगे.
पटना के ज्ञान भवन में आयोजित छठे भारत प्रक्षेत्र राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन का दीप प्रज्वलित कर विधिवत शुरुआत हुई. सम्मेलन में 52 देशों से प्रतिनिधि आए है. लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन ने उद्घाटन सत्र के अपने संबोधन में कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक परिपक्वता और राजनीतिक सूझबूझ की कोई सानी नहीं. प्रदेश को एक ऐसा मुख्यमंत्री मिला है, जो सतत बिहार को न्याय के साथ विकास देने में लगे हुए हैं. सत्ता ऐसे ही व्यक्ति को मिलनी चाहिए जो उपभोग शून्य आदमी हो.


उन्होंने कहा कि आज ही कर्पूरी जी की पुण्यतिथि है. बिहार जनकनंदीनी सीता की जन्मस्थली है. यहां आर्यभट्ट, बाबा नागार्जुन और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर भी हैं, जिन्होंने संस्कृति के क्षेत्र में बहुत काम किया. आज का जो विषय है, हमलोगों को संसदीय प्रणाली को टिकाऊ बनाना है. दूसरा विषय है कि हम लोकतंत्र को कैसे ताकत प्रदान कर सकते हैं. आज बिहार में यह हो रहा है. विश्व का पहला गणतंत्र बिहार में था वैशाली. ऐसे जगह पर हम लोकतंत्र पर विचार करेंगे. लोकतंत्र के अलग-अलग खंभे, जिसमें एक न्यायपालिका भी है.
महाजन ने कहा कि लोकतंत्र कैसे बेहतर तरीके से चले और खड़ा रहे साथ ही इसके सभी स्तंभों में संतुलन बना रहे, इस पर भी चर्चा होगी. किस प्रकार सबका सहयोग लेकर इसे किया जा सकता है. सिर्फ कानून बनाने से नहीं होगा, योजनाओं को जमीन तक पहुंचना जरूरी है. लोक जागरण जरूरी है. इसके लिए जनप्रतिनिधिओं को सोचना जरूरी है. सरकार से मिलने वाला एक-एक पैसा जन-जन तक पहुंचना चाहिए. हमने स्पीकर्स रिसर्च इनिशियेटिव शुरू किया. लोकसभा में एक बात चलायी, विशेषज्ञों को बुलाकर जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा करायेंगे और बाद में अच्छे से उसका प्रयोग कर सकें. सरकार जनता की है, हमने अधिकारियों से कहा आप NGO को गैर सरकारी संगठन कहने की जगह सामाजिक संस्था कहें.
उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार देना है, उनके मूल समस्याओं को समझना है. हर किसी को स्वच्छता और सफाई पर ध्यान देना चाहिए. मुख्यमंत्री ने एक जन आंदोलन खड़ा किया, शराबबंदी, दहेज प्रथा और बाल विवाह के प्रति लोगों ने एकजुटता दिखायी और मानव श्रृंखला बनाया.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि गरीबी, अशिक्षा, लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय मुख्य विंदू है. बिहार में हमलोग इसको ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं. आजादी की लड़ाई का नेतृत्व बापू ने किया, उनके विचार को लोहिया जेपी ने आगे बढ़ाया. सत्ता का विकेंद्रीकरण जरूरी है. केंद्रित तरीके से सिर्फ कुछ इलाकों का विकास होता है. हर इलाके के लोगों को विकास का लाभ मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा कि गांधी जी ने बिहार में पाया कि स्वच्छता, सफाई, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर यहाँ कोई जागृति नहीं है. अपने अभियान से महिलाओं को जोड़कर उन्होंने सफाई, स्वास्थ्य, स्वच्छता और शिक्षा के प्रति लोगों को प्रेरित किया. महिलाओं की विकास में भागीदारी जरूरी है. हमने महिलाओं की जागृति पर काम किया, महिलाओं को त्रिस्तरीय पंचायत और निकायों के चुनाव में पचास प्रतिशत आरक्षण दिया. अब तो महिलाएं पचास प्रतिशत से ज्यादा सीटों पर जीत भी रही है. हमने पुलिसबल में भी 35 प्रतिशत आरक्षण दिया. हर थाने में अलग से शौचालय की व्यवस्था की गयी. आगे बिहार की सभी सेवाओं में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जायेगा.
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उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण की दिशा में बिहार में अनेक पहल हुई है. हमने शराबबंदी महिलाओं के कहने पर लागू किया. महिलाओं में इतनी जागृति आ रही है कि प्रदेश में आठ लाख सेल्फ हेल्प ग्रुप है. उनमें समाजिक तौर पर जागृति आ रही है. गांव की कम पढ़ी लिखी महिलाएं भी बैंक और बाकी चीजों के बारे में जान रही हैं. दहेज प्रथा और बाल विवाह को समाप्त करने के लिए 21 जनवरी को 14 हजार किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी मानव श्रृंखला बनी. यह बुद्ध की भूमि है. यह महावीर की भूमि है. यहां लोग आ रहे हैं, यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ गयी है. यहां शुकराना समारोह में लाखों लोग आये.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के पुराने इतिहास पर सबको नाज होता है. गौरव के उसी स्थान को फिर से प्राप्त करना है. केंद्र सरकार ने जीविका के मॉडल को हूबहू स्वीकार कर लिया. लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े बिल को पारित किया जाना चाहिए. जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण पर ध्यान देना होगा. संसद की सबसे बड़ी भूमिका है. बिहार के बारे में तरह-तरह की बातें होती रहती हैं. आजकल ज्यादातर लोग राजनीतिक स्वार्थ के लिए काम करते हैं. हमलोग वोट की नहीं, वोट देने वालों की चिंता करते हैं.

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