ई-वे बिल के बिना माल ट्रांसपोर्ट करने पर लगेगी 10 हजार की पेनाल्टी, टैक्स चोरी पर लगेगी लगाम

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जीएसटी के लागू होने के बाद से अगर इनपुट टैक्स क्रेडिट के बाद किसी शब्द की बहुत ज्यादा चर्चा हुई है तो वह है ई-वे बिल। इसे 1 फरवरी से बड़े तामझाम के साथ लागू किया गया लेकिन तकनीकी खामियों की वजह से तुरंत उसे टालना भी पड़ गया। बहरहाल, इसके लागू होते ही जीएसटी में टैक्स की चोरी पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकेगी।
टैक्स चोरी पर रोक लगाने के साथ ही इससे परिवहन में लगने वाला समय भी बचेगा। सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार औसतन एक ट्रक को चेकपोस्टों पर 20 फीसदी वक्त जाया करना पड़ता है। राजस्थान एवं महाराष्ट्र जैसे राज्यों में यह 20-30 मिनट है जबकि बिहार और झारखंड में दो घंटे तक।
अभी टैक्स अधिकारियों को वे बिल को टैक्स रिटर्न के साथ खुद मिलान करना पड़ता है। ई- वे बिल के जेनरेट होते ही वह सप्लायर के जीएसटीआर1 रिटर्न के साथ दिखने लगेगा। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों के अपने परिवहन नियमों के कारण हो रही परेशानी भी दूर हो जाएगी, जिससे कई टन पेपरवर्क से निजात मिलेगी।
मैकिंजी की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल परिवहन अवरोधों के कारण 45 अरब डॉलर (लगभग 28.80 खरब रुपये) यानी जीडीपी के चार फीसदी से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ रहा है। विश्व बैंक के एक सर्वे के मुताबिक भारत में परिवहन लागत किसी वस्तु के मूल्य के 14 फीसदी के बराबर है जबकि विकसित देशों में यह 6-8 फीसदी है। ई-वे बिल लागू होने के बाद से परिवहन लागत में 20 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है।

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