गोवा के एक गांव ने एक झटके में न सिर्फ खुले में शौच की समस्या से छुटकारा पा लिया बल्कि मल के निपटारे की व्यवस्था भी कर ली है.
ओल्ड गोवा के 5 किलोमीटर के दायरे में फैले Carambolim गांव को वर्ल्ड हेरिटेज साईट का दर्ज़ा हासिल है. इस गांव की पहचान यहाँ मौजूद Karmali Lake से है, जो प्रवासी पक्षियों के साथ ही कई अन्य जीवों का आशियाना भी है. इसका श्रेय आर्किटेक्ट Tallulah D’Silva और एक स्थानीय NGO को जाता है, जिन्होंने बच्चों और ग्रामीणों को अपने- अपने घरों में EcoLoos बनाने के लिए प्रेरित किया.
कुछ साल पहले ऐसा नहीं था, सीवेज और पाइपलाइन की कोई व्यवस्था नहीं होने की वजह से शौचालय से निकला मल सीधे इस झील में जाता था, जिसकी वजह से यह झील एक बदबूदार नाले में तब्दील हो चुका था.
2 वर्ष पूर्व पणजी के एक NGO ने बच्चों की बाल ग्राम सभा कर सबसे अपने विचार रखने को कहा. जिसके यह बात सामने आई कि टॉयलेट न होने की वजह से उनके गांव की झील किस तरह प्रदूषित हो रही है. इसके बाद NGO और एक आर्किटेक्ट Tallulah D’Silva ने बच्चों और ग्रामीणों को अपने घरों में EcoLoos बनाने के लिए प्रेरित किया.

EcoLoos की अहमियत बताने के लिए आर्किटेक्ट Tallulah D’Silva ने कई बार गांव का दौरा किया. धीरे-धीरे इसके प्रति लोगों में जागरूकता फैलने लगी. EcoLoos के बारे में Tallulah D’Silva ने लोगों को बताया कि ‘इसके अंतर्गत दो चैम्बर बनाये जाते हैं. एक का इस्तेमाल टॉयलेट के रूप में होता है, जबकि दूसरे में मल एकत्रित होता है. इस चैम्बर में गांव में बड़े आराम से मिल जाने वाली मिट्टी और राख मिलाई जाती है. चैम्बर को भरने में 6 महीने लगता है, जिसके बाद इन्हें खाली कर दिया जाता है, तब तक यह मल खाद के रूप में बदल जाता है. ये खाद मिट्टी में जान फूंकने का काम करती है और हरियाली को बरक़रार रखती है.
NGO ने फंड जुटाने के लिए लोगों को जोड़कर उन्हें ही स्पोंसर्स के रूप में जुटाया. प्रभाकर नाइक इस गांव के पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने अपने घर में EcoLoos बनावाया. EcoLoos को बनवाने में 20 से 50 हज़ार रूपये तक का खर्च आता है.
झील को बचाने के लिए बच्चों के प्रयास से गांव में कई सूखे टॉयलेट बन गये हैं, जो सुरक्षित होने के साथ-साथ इको-फ्रेंडली भी है. बेकार और सबसे गंदे पदार्थ को खाद में बदल कर यह न सिर्फ़ प्रकृति को नुकसान से बचाता है बल्कि हरियाली फैलाने में भी अपनी अहम भूमिका अदा करता है.
Carambolim में इसकी कामयाबी को देखने के बाद कई कंपनियां CRS इनिशिएटिव के तहत गोवा के Kakra में ऐसे ही टॉयलेट बनवाने के लिए आगे आई हैं.

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