फ्रांस और भारत के हर सेक्टर में गहरे रिश्ते हैं। पेरिस इस दौरे का अहम पड़ाव है। फ्रांस के साथ भारत ने व्यक्तिगत रूप से मैंने क्लाइमेट चेंज को लेकर कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। पेरिस एग्रीमेंट विश्व की एक सांझी विरासत है। इस वक्त पर्यावरण और आतंकवाद इंसानियत के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं।
प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी अपने 4 देशों के दौरे के अंतिम पड़ाव पर फ्रांस में हैं। जहाँ मोदी और फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों के बीच प्रेसिडेंट के आधिकारिक आवास एलिसी पैलेस में बाइलेटरल टॉक हुई। मीटिंग के बाद ज्वाइंट स्टेटमेंट में मोदी ने कहा कि फ्रांस और भारत के हर सेक्टर में गहरे रिश्ते हैं। हम मिलजुलकर काम करते हैं। हमारे संबंध केवल दो देशों तक सीमित नहीं हैं। हम इंसानियत की अच्छाई के लिए काम करते हैं। डेवलपमेंट का हमारा दायरा बहुत बड़े मंच तक है। चाहे वो टेक्नोलॉजी का मसला हो या फिर ट्रेड की बात हो। इन्वेस्टमेंट, इनोवेशन, एजुकेशन, एनर्जी, आंत्रप्रेन्योर हर मामले में हम साथ हैं। भारत के युवा कैसे फ्रांस को ज्यादा समझें इस पर भी हमारी चर्चा हुई। डेवलपमेंट और डिफेंस पर भी हमारी भागीदारी है।
मोदी ने कहा कि कम्युनिकेशन का इस्तेमाल भी ज्यादा है और खतरा भी ज्यादा है। इस पर भी हम मिलजुलकर कैसे काम करें, चर्चा हुई। हिंदुस्तान के डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में शहादत दी, उन्हें हम लोग श्रद्धांजलि देने जा रहे हैं। फ्रांस के साथ भारत ने और व्यक्तिगत रूप से मैंने क्लाइमेट चेंज को लेकर कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। पेरिस एग्रीमेंट इस पीढ़ी की देन है, जो भावी पीढ़ी की विरासत बनने की आशा को जन्म देती है। ये केवल पर्यावरण सुरक्षा का मामला नहीं, हम सबकी मदर अर्थ को बचाने की साझा जिम्मेदारी है। हम भारत वासियों के लिए प्रकृति की रक्षा हमारे विश्वास का मसला है।

मोदी ने कहा कि जो हमें सदियों से शिक्षा मिली है ये हमारी वैदिक काल से शिक्षा है। आखिरकार अंत में यही सबका कल्याण करेगी। प्रकृति के लिए संस्कार, स्वभाव से हम समर्पित हैं। भावी पीढ़ी को जो भी मिला है, वो इसलिए क्योंकि हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए बचाकर रखा। हमारा कर्तव्य बनता है कि भावी पीढ़ी के लिए शुद्ध हवा, शुद्ध पानी, प्राकृतिक संसाधन दें। ये काम समझौते के साथ भी है और हम समझौते के बाद भी मिलकर इस काम को करेंगे। भावी पीढ़ी को कुछ न कुछ तोहफा देकर जाएंगे। इस दिशा में हमने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पेरिस की धरती पर एक महत्वपूर्ण फैसला हुआ इंटरनेशनल सोलार अलायंस का। इसको आगे बढ़ाने के लिए उनका कमिटमेंट है। फ्रांस और भारत ने मिलकर इस कल्पना को जन्म दिया और फ्रांस के राष्ट्रपति इसे आगे बढ़ाने के लिए बेहद संजीदा और संकल्पवान हैं।
मोदी यहां पेरिस में मैक्रों से चर्चा करेंगे। इस दौरान दोनों देशों का स्ट्रैटजिक रिलेशन मजबूत होने की उम्मीद है। दोनों देश आतंकवाद से पीड़ित हैं। इसलिए बातचीत में यह अहम मुद्दा हो सकता है। दोनों देशों के बीच स्पेस, नॉन-एटॉमिक, डिफेंस और इकोनॉमिक सेक्टर्स में मजबूत सहयोग है। फ्रांस भारत में नौवां सबसे बड़ा इन्वेस्टर है, जिसने अप्रैल 2000 से जनवरी 2017 तक 5.55 अरब का इन्वेस्टमेंट किया। 2016 में कारोबार 9.60 अरब डॉलर का रहा। 39 वर्षीय मैक्रां ने पिछले महीने फ्रांस के सबसे युवा राष्ट्रपति बनकर इतिहास रचा था। प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव में जीत मिलने पर मैक्रां को फोन करके बधाई दी थी और कहा था कि वह द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं।

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