सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त ऑडिटर्स की जांच से स्पष्ट हुआ है कि आम्रपाली समूह ने पांच सौ से अधिक लोगों के नाम पर एक रुपये, पांच रुपये और ग्यारह रुपये वर्गफुट की दर से फ्लैट की बुकिंग कर रखी थी. यही नहीं ऑफिस में काम करने वाले चपरासी, ड्राइवर्स और अन्य कर्मचारियों के नाम पर तेईस कंपनियां बना कर उनमें घर खरीदने वाले खरीदारों के पैसों को डायवर्ट किया गया.
आम्रपाली समूह में हुए फर्जीवाड़े का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त ऑडिटर्स ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आम्रपाली समूह ने करीब 500 लोगों से अधिक के नाम पर 1 रुपये, 5 रुपये और 11 रुपये वर्गफुट की दर से फ्लैट की बुकिंग की है. जांच में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि आम्रपाली ने ऑफिस में काम करने वाले चपरासी, ड्राइवर्स और अन्य कर्मचारियों के नाम पर 23 कंपनियां बनायी और फिर उनमें घर खरीदने वाले खरीदारों के पैसे को डायवर्ट किया गया.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा और यू यू ललित के बेंच को सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट में फॉरेंसिक ऑडिटर्स ने जानकारी दी उन्होंने उन 655 लोगों को नोटिस जारी किया, जिनके नाम से बेनामी फ्लैट को बुक किया गया है. लेकिन 122 ठिकानों पर ऐसे किसी एक व्यक्ति का भी पता नहीं चल पाया.


फॉरेंसिक ऑडिटर पवन कुमार अग्रवाल ने बेंच को बताया कि मार्च 2018 तक कम्पनी के CFO के खाते में 12 करोड़ रुपये थे. इसके बाद उसने एक करोड़ रुपये अपनी पत्नी को भेजे. सुप्रीम कोर्ट में पहली बार पेश होने से ठीक तीन दिन पहले उसने कुछ अज्ञात लोगों को 4.75 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए. इसके बाद वाधवा को कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि आप न्याय की राह में रोड़ा अटका रहे हैं. तुम्हें पता था कि कोर्ट इस पैसे के बारे में पूछेगा और इसलिए तुमने इसे ट्रांसफर कर दिया. हम सात दिनों के भीतर वह पूरा पैसा वापस चाहते हैं. 23 अक्टूबर 2018 को पैसे ट्रांसफर करने की कोई जरूरत नहीं थी, हम इसके लिए आपको न्यायालय की अवमानना के लिए जिम्मेदार मान सकते हैं.
कोर्ट ने फॉरेंसिक ऑडिटर्स से आयकर विभाग का वह आदेश भी पेश करने का आदेश दिया, जिसके तहत 2013-14 में 200 करोड़ रुपये के बोगस बिल जब्त किए गए थे. फॉरेंसिक ऑडिटर रवि भाटिया ने कोर्ट को बताया कि आम्रपाली समूह ने आयकर विभाग के आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसके बाद उस पैराग्राफ को डिलीट कर दिया गया, जिसमें 200 बोगस बिल की जानकारी थी. बेंच ने कहा कि आप हमारे समक्ष आयकर विभाग और अपीली प्राधिकरण दोनों के आदेश जमा करें, हम उन्हें देखना चाहेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही जेपी मॉर्गन रियल एस्टेट फंड के भूमिका की भी जांच करने का आदेश दिया. कंपनी ने 2010 में आम्रपाली के जोडिएक में 85 करोड़ रुपये का निवेश किया था. कंपनी ने यह निवेश शेयरों की खरीद के जरिए किया था और फिर बाद में इसे आम्रपाली की सहायक कंपनी को बेच दिया था. ऑडिटर्स की जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि जेपी मॉर्गन रियल एस्टेट फंड और आम्रपाली समूह के बीच शेयर खरीद का समझौता नियमों के खिलाफ है. इसके बाद अदालत ने जेपी मॉर्गन के वकील और इसके भारत प्रमुख को एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा.
आम्रपाली ग्रुप पर 42 हजार खरीदारों को वक्त पर घर का पोजीशन नहीं दे पाने का आरोप है. खरीदारों ने घर मिलने में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी.



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