आधार लिंक करने की समयसीमा नहीं बढ़ेगी : सुप्रीम कोर्ट

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वेलफेयर स्कीम्स को आधार से लिंक करने की समयसीमा को सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाने से इनकार कर दिया है. सरकार इन योजनाओं का लाभ ले रहे लोगों के खाते में पैसा भेजती है. याचिका में वेलफेयर स्कीम्स को आधार से लिंक करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग की गई थी. याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में 5 जजों की बेंच ने की.
सुनवाई के दौरान यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के सीईओ अजय भूषण ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन देते हुए कहा कि डेटा और बॉयोमेट्रिक की सिक्युरिटी तोड़ने में करोड़ों साल लगेंगे. सरकारी सिस्टम में आधार सत्यापन में सफलता दर 88 फीसदी रही है. वहीं, बैंक में 95 फीसदी और टेलीकॉम में हमने 97 फीसदी सत्यापन कर लिया है.

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट केवी विश्वनाथ ने कहा कि यूआईडीएआई सीईओ दावा कर रहे हैं कि सरकारी सिस्टम में आधार सत्यापन में सफलता दर 88 फीसदी रही है. इसका मतलब है कि 12 फीसदी लोगों को सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. इस तरह देश में 14 करोड़ लोग छूट रहे हैं, यह एक बहुत बड़ा आंकड़ा है. अटॉर्नी जनरल केके वेनुगोपाल ने कहा कि कोई भी छोड़ा नहीं गया है. अभी तक ऐसा एक भी केस सामने नहीं आया है, जिसमें आधार की वजह से किसी को सेवा लाभ नहीं मिल पाया हो. दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद बेंच ने कहा कि इस स्थित में हम किसी भी तरह की अंतिरम राहत का आदेश नहीं दे सकते.
यूआईडीएआई के सीईओ भूषण ने बताया कि एनरोलमेंट की प्रक्रिया यूआईडीएआई के ऑनलाइन सॉफ्टवेयर पर होती है. आॅपरेटर के सेव बटन दबाते ही डेटा सुरक्षित हो जाता है. इसकी सिक्युरिटी को तोड़ने में करोड़ों साल लगेंगे. उन्होंने कोर्ट को बताया कि निजी एनरोलमेंट एजेंसियों को बता दिया गया है था कि आधार एक्ट के तहत डेटा को शेयर करने पर दंडित किया जाएगा. भूषण ने बताया कि आधार के लिए लोगों की कम ही जानकारी ली जाती है. इसमें हम फोटोग्राफ, फिंगरप्रिंट, आयरिश और जनसांख्यिकी संबंधी जानकारी लेते हैं, धर्म, जाति, भाषा, आय या मेडिकल हिस्ट्री नहीं लेते. इसमें नागरिकों की किसी भी तरह की निगरानी का सवाल ही नहीं उठता. सुनवाई के अंत में याचिकर्ता के वकील ने 20 सवालों की सूची अदालत को सौंपी. इस पर कोर्ट ने यूआईडीएआई के सीईओ से सवालों के लिखित जवाब देने को कहा है. सरकारी योजनाओं का फायदा लेने के लिए केंद्र ने आधार को जरूरी किया है. इसके खिलाफ तीन अलग-अलग पिटीशन्स सुप्रीम कोर्ट में लगाई गईं. इनमें आधार की कानूनी वैधता, डेटा सिक्युरिटी और इसे लागू करने के तरीकों को चुनौती दी गई.
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सरकार और उसकी एजेंसियां योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार को जरूरी ना बनाएं. बाद में कोर्ट ने केंद्र को ये छूट दी थी कि एलपीजी सब्सिडी, जनधन योजना और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में लोगों से वॉलियन्टरी आधार कार्ड मांगे जाएं. उधर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने पैन को आधार से जोड़ने की समयसीमा को बढ़ाकर 30 जून कर दिया है. अभी तक यह समयसीमा 31 मार्च थी. आदेश में कहा गया है कि आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए पैन- आधार को जोड़ने की समयसीमा बढ़ाई जा रही है.


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