सीमा पार से लगातार हो रही फायरिंग और पुलिस व सेना के जवानों पर हो रहे आतंकी हमलों के बावजूद जम्मू-कश्मीर के नौजवान डरने वाले नहीं। जिसका प्रमाण हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों की कश्मीरियों को सेना से दूर रहने की चेतावनी के 4 दिन बाद ही कश्मीर में देखने को मिला जब करीब 2000 कश्मीरी युवा सुरक्षा बलों में जाने को तैयार दिखे।
श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में घाटी के 2000 युवक-युवतियां पुलिस सेना भर्ती की परीक्षा में शामिल हुए। जबकि इससे दो दिन पहले ही शोपियां में आर्मी अफसर लेफ्टिनेंट उमर फयाज की हत्या कर आतंकियों ने कश्मीरी युवाओं को सेना से दूर रहने की चेतावनी दी थी।
विभिन्न आतंकी संगठन कश्मीरी युवाओं को सुरक्षा बलों या पुलिस में भर्ती ना होने की चेतावनी देते रहते हैं और कई धमकी भरे विडियो भी जारी करते रहते हैं। इन सबके बावजूद घाटी के युवा ना केवल इन धमकियों की परवाह किए बिना जम्मू-कश्मीर की पुलिस भर्ती के लिए लाइन में खड़े दिखे बल्कि उनकी संख्या जम्मू से आने वाले युवाओं की संख्या से काफी ज्यादा थी।

जम्मू-कश्मीर पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के लिए 67000 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 35,722 कश्मीर से थे जबकि जम्मू से आने वाले उम्मीदवारों की संख्या मात्र 31, 496 थी।
जम्मू-कश्मीर डीजीपी एसपी वैद्य ने बताया कि कश्मीरी लड़कियों ने समाज की तमाम रूढ़ियां को तोड़ते हुए पुलिस भर्ती के फिजिकल टेस्ट में हिस्सा लिया। 6000 से ज्यादा कश्मीरी लड़कियां सब-इंस्पेक्टर्स की भर्ती के लिए हुए फिजिकल टेस्ट में शामिल हुईं।
लड़कियां ने कहा कि वे आतंकियों से खतरा मोल लेने को तैयार हैं, आंतकवादी सही राह पर नहीं चल रहे हैं और उनकी बीमारी का इलाज किया जाना जरूरी है। स्थानीय महिलाओं की मदद जरूरी है क्योंकि कश्मीर में आंतकवाद की वजह से औरतों ने बहुत मुसीबतें झेली हैं, उनकी मुश्किलों की तरफ ध्यान दिया जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार घाटी से उम्मीदवारों के लिए फिजिकल टेस्ट का पहला चरण शनिवार 13 मई से शुरू हुआ। इसके बाद अन्य जिलों में यह शुरू होगी। पिछले साल स्पेशल पुलिस ऑफिसर की भर्ती के लिए 25000 युवकों ने आवेदन किया था। ताज़ा अपडेट पाने के लिए हमारे पेज को लाइक करें

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